लेखक की कलम से

लेखक की कलम से

  • भाग गयी लड़कियाँ ….

    लड़कियां भाग गयी इस शब्द का प्रयोग शर्मनाक है। लड़की या लड़के ने प्रेम विवाह किया ये कहने में क्या जाता है? जब माता पिता बेटी की शादी करते हैं तो कहते है विदाई कर दी! लड़कियां अपने घर रहती ही कब हैं। पराई होती हैं। लेकिन जब लड़की प्रेम विवाह कर ले तो कहा जाता है लड़की भाग गयी, इतने गंदे शब्दों से नवाज़ा जाता है। क्या लड़कियों को…

  • लंदन शहर …..

      बहुत  खूबसूरत है   लंदन शहर दिवास्वप्न है सबका लंदन शहर   प्यारे  समुंदर हैं        चारों तरफ़ सुन्दर   नज़ारे हैं       चारों तरफ दिल को लगे ये बहुत प्यारा प्यारा लंदन शहर सारी दुनिया से न्यारा   सोये न जागे ये आठों पहर बहुत खूबसूरत है लंदन शहर   हँसी वादियों का है शहरे-लंदन धुआं बादलों का है शहरे-लंदन चांद और-सूरज दिखें मुश्किलों से ठंडी हवाओं का है शहरे लंदन  …

  • प्यार ….

    गज़ भर ही दूर है किनारा … ऐसा लगा मुझे, कि बस… लपक कर , पकड़ लूंगी। मैं लपकी भी। पर यह क्या? वो तो रेत का था, मेरे हाथों से फिसल गया। शायद…. जो हर बार मुझे आख़िरी लगा‌ ये तो वही सवाल था, मेरे प्यार का तेरे इनकार का, लेकिन… हर जवाब ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया। मेरे अदने से प्यार को, और बड़ा कर दिया।…

  • राहुल की महाराष्ट्र पदयात्रा के मायने, सच में कोई फायदा है क्या ….

    संदीप सोनवलकर वरिष्ठ पत्रकार । हाल ही में दिवंगत समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव निजी बातचीत मे अक्सर कहा करते थे कि नेता तब तक ही सामयिक है जब तक उसके बारे में चर्चा और पर्चा दोनों होते रहे .. यानि मीडिया में खबर छपे और लोगों मे चर्चा हो . नेता जी ये बात अपने ठेठ अंदाज में कही थी लेकिन राजनीती का यही सौ आने सच है ..…

  • ताज …

      बेटी एक प्रेम और लक्ष्मी के सिंघासन पर बैठाई गयी एक देवी है ,माता पिता भी बेटी के हाथ जल्दी पीले करने की सोचते रहते हैं ,क्योंकि उन्हें डर रहता है की समाज की तीखी जवा़न या भूखी नजरें  उनकी बेटी पर हमला न कर दे । लेकिन बेटी के भी अपने दायरे होने चाहिए ये भी जरुरी है उसका अपना भी स्वाभिमान होना चाहिए कि कोई मुझसे गलत…

  • कब तुम मिलने आओगे …

      मेरी आंखों में खुशियों के नीर बहुत बरसाओगे कब तुम मिलने आओगे   प्रतिक्षण तेरा इंतज़ार है मन की मेरी गलियों को उपवन हंसता खिलता रहता देख देख इन कलियों को मधुर गीत गाते हैं भंवरे तेरे स्वागत में प्रियतम यादों का कोलाहल होता रहता मन में ही हरदम और प्रतिक्षा कितना कर लूं कितना तुम तड़पाओगे कब तुम मिलने,,,,,, सांसों पर एक नाम है तेरा आंखों में बस…

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