
इकोनॉमी
न भूली मैं अब तक……..
न भूली मैं अब तक,
तेरी मेरी वो कहानी,
गुजरा जमाना याद आता है,
तुझसे मिलना,
मिलकर फिर बिछड़ना,
वो आलम याद आता है,
अरसों तरस गए हम,
तेरे दीदार को,
एक अरसा बीता,
न आए फिर तुम,
वो गुजरा जमाना याद आता है,
तुम भी मशगुल हो गए,
अपनी जिंदगी में,
मैं भी मशगुल हो गई,
अपनी जिंदगी में,
न आया सुकून,
अब तक मेरी जिंदगी में,
कहां खो गए तुम,
कहां अब ढूंढूँ तुझे,
हर नजरों में ढूंढा अक्स तेरा,
हर तरफ तुम ही तुम नजर आए मुझे,
चाहत की खोज में तेरी,
गुजर न जाए यह जिंदगानी मेरी,
नजर आ जाओ कहीं तुम मुझे,
ऐसा कोई खुदा का एहसान हो जाए ……।।
©पूनम सिंह,गुरुग्राम, हरियाणा















