मध्य प्रदेश

टक्कर से पहले खुद ही रुक जाएगी ट्रेन, ट्रेनों के इंजनों को ‘कवच’ से लैस करेगा रेलवे, यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से दुर्घटनाओं की रोकथाम के प्रयास में युद्ध स्तर पर जुटे रेलवे …

भोपाल/रतलाम। ट्रेनों को टक्कर से बचाने के लिए रेलवे अपने नेटवर्क को दुनिया की सबसे सस्ती स्वचालित ट्रेन टक्कर सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ से लैस करेगा। दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा मार्ग के 3,000 किलोमीटर लंबे अपने नेटवर्क के साथ ही पश्चिम रेलवे के सभी छह मंडल में इंजन में ‘कवच’ लगाने की शुरुआत हो रही है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। पश्चिम रेलवे के नागदा-रतलाम-गोधरा के 227 किमी के मार्ग पर ये कवच इंजन में लगाए जाएंगे।

रेल विभाग के अनुसार ने मिशन रफ्तार के तहत लगभग 1000 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से ट्रेनों के संचालन में संरक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत 208 करोड़ रुपए की लागत से रतलाम रेल मंडल में प्रतिदिन 150 यात्री ट्रेन में यात्रियों को सुरक्षा मिलेगी। कवच को मेधा सर्वो ड्राइव्स प्राइवेट लिमिटेड, एचबीएल पावर सिस्टम्स लिमिटेड और केर्नेक्स माइक्रोसिस्टम्स के सहयोग से भारतीय रेलवे (आइआर) के अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) ने विकसित किया है। कुछ समय पहले पूर्व मध्य रेलवे द्वारा भी मिशन रफ्तार के तहत लगभग 208 करोड़ रुपये की लागत से पं. दीन दयाल उपाध्याय जं. से प्रधानखांटा तक ट्रेनों के संचलन में संरक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ के अंतर्गत लाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चार चरणों में पूरी होने वाली इस परियोजना के पहले चरण में सोननगर से गया का कार्य प्रारंभ होगा। इस पूरी परियोजना को वर्ष 2024 के अंत तक पूरा कर लेने का लक्ष्य है।

इस तरह से काम करती है प्रणाली

रेल अधिकारियों ने बताया कि ‘कवच’ एक टक्कर रोधी तकनीक है। यह प्रौद्योगिकी रेलवे को इंजन की आमने-सामने की दुर्घटना रोकने में मदद करेगी। यह प्रौद्योगिकी माइक्रो प्रोसेसर, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम और रेडियो संचार के माध्यमों से जुड़ी रहती है। तय दूरी के भीतर उसी ट्रैक पर दूसरी ट्रेन का पता लगाती है, वहीं यह सिस्टम ट्रेन के इंजन में लगे उपकरण के माध्यम से निरंतर सचेत करते हुए स्वचालित ब्रेक लगाने में सक्षम है। यह प्रणाली ट्रेनों को तब स्वत: ही रोक देती है, जब डिजिटल प्रणाली को रेड सिग्नल तोड़ने या कोई अन्य खराबी का पता चलता है। इसके लिए पटरियों के साथ रिसीवर स्थापित किए जाएंगे और ट्रांसमीटर लोको के अंदर लगाए जाएंगे। पटरियों पर किए जाने वाले कार्यों की अनुमानित लागत 20 लाख रुपए प्रति किलोमीटर है, जबकि इंजन के अंदर स्थापना की लागत 60 लाख रुपए प्रति लोको (रेल इंजन) होगी। लोको पॉयलट जब पूरी गति से ट्रेन को चला रहा हो तब ये खतरे के बारे में बताते हुए ब्रेकिंग सिस्टम को स्वचालित रूप से सक्रिय करता है। कवच प्रणाली मौजूदा सिग्नल सिस्टम के साथ संपर्क बनाए रखती है तथा इसकी जानकारी ट्रेन संचालन से जुड़े सभी कर्मचारियों को निरंतर देती है। यह प्रणाली किसी भी आपात स्थिति में स्टेशन एवं लोको ड्राइवर को सचेत करने और साइड, आमने-सामने व पीछे से होने वाली टक्करों की रोकथाम करने में सक्षम है।

अगले एक साल में 1,48,463 लोगों की होगी भर्ती

रेलवे अधिकारियों ने कहा कि टेंडर्स उत्तर रेलवे, उत्तर मध्य रेलवे, पश्चिम मध्य रेलवे, पूर्व मध्य रेलवे, पूर्वी रेलवे और पश्चिम रेलवे की तरफ से मंगाए गए हैं। इसके तहत महत्वपूर्ण दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई मार्ग आएंगे। अगले एक साल में 1,48,463 लोगों की भर्ती की जाएगी, जबकि पिछले आठ वर्षों में औसतन सालाना 43,678 लोगों की भर्ती की गई। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले 18 महीनों में विभिन्न विभागों और मंत्रालयों में 10 लाख लोगों की भर्ती करने के निर्देश के बाद आया है।

पीएम मोदी ने दिया भर्ती करने का निर्देश

सरकारी सूत्रों ने कहा कि पीएम मोदी के निर्देश के बाद विभिन्न विभागों और मंत्रालयों को रिक्तियों का विवरण तैयार करने के लिए कहा गया था और समग्र समीक्षा के बाद 10 लाख लोगों की भर्ती करने का निर्णय लिया गया। विभिन्न विधानसभा चुनावों के दौरान, विपक्षी दलों ने बेरोजगारी के मुद्दे पर भाजपा को घेरने की कोशिश की है। रेलवे ने कहा कि 2014-15 से 2021-22 तक, उसने कुल 3,49,422 लोगों की भर्ती की, जिसका औसत 43,678 प्रतिवर्ष था, जबकि 2022-23 में वह 1,48,463 लोगों की भर्ती करेगा।

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