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आखिर क्युं …

अभी सुबह के 10 ही बजे थे कि अनुपमा दौड़कर अपने बरामदे में आती है और झट से घर का दरवाजा खोलते हुए एक वृद्ध महिला को प्रातः अभिवादन करती है जो कि पहले से ही दरवाजे पर बैठकर उसकी राह देख रही थी।

अनुपमा पेशे से एक शिक्षिका है इसलिये वो अपने हाथों में कुछ पठन-पाठन की सामग्रियां लिये है।दोनों साथ-साथ चलने लगते हैं । वैसे तो अनुपमा की चाल किसी हिरणी इतनी तेज होगी क्युंकि वह लगभग 25 साल की एक आविवहित युवती थी लेकिन वह वृद्ध महिला की चाल के बराबर ही उनके साथ चल रही थी ताकि रास्ते में उन्हें किसी प्रकार की असहजता ना हो वैसे ही चलते हुए वे दोनों कुछ ही देर में अपने नगर के डाकघर में प्रवेश करतीं हैं जो की उनके घर से कुछ ही दूरी पे था।

वृद्ध महिला अनुपमा के हाथों में एक छोटे से रुमाल की गठरी पकड़ाते हुए वहीं एक कोने में जमीन पर बैठ जाती है अनुपमा भागकर काउंटर से एक पर्ची लाती है और अपने पर्स से कलम निकालकर पर्ची के रिक्त स्थानों को भरती है साथ ही निकालती है रुमाल की गठरी में बंधे रुपयों को जो की बहुत ही दयनीये स्थिति में थे कुछ सिक्के जो रखे-रखे अपनी चमक खो रहें थें,साथ ही कुछ दस और बीस रुपये के तुड़े- मुड़े नोट थें जो की अपनी अन्तिम अवस्था में थें।अनुपमा रुपयों को सुलझा-सुलझा कर गिन रही थी क्युंकि पर्ची में रुपयों की पूरी गणना वाले रिक्त स्थान की माँग थी।

अनुपमा ज्यों-ज्यों रुपयों को सुलझाती है त्यों-त्यों उसका मन घिरता जाता है काले बादलों से जो कि उसके मन में उठ रहे अनगिनत प्रश्नों का बादल है।

अनुपमा का निश्छल मन रुपी आकाश उस वृद्धा की वेदनाओं को नहीं झेल पा रहे थें जो की उसके गठरी के नोट साफ-साफ बयां कर रहें थें।

अनुपमा की खामोशियां चीख-चीखकर कई प्रश्न कर रहीं थीं, ,,,,,,,,,,,,

कि आखिर क्युं एक वृद्धा इतनी आसहाय है, जो कि खुद दो- दो बेटों की माँ हैं?

आखिर क्युं एक वृद्धा अपने भविष्य की दवाईयों की जुगाड़ के लिये के लिये आज अपना पेट काटती है ??? जबकि खुद उसने अपने बच्चों का भविष्य संवारते हुए अपना जीवन लगा दिया।

आखिर क्युं उन्हें अब अपने चंद दिनों के जीवन के लिये इतनी जद्दो-जहद करनी पड़ रही है

आखिर क्युं???

आखिर क्युं???

 

अनुपमा के मन में उमड़ते बादल और घने होते जा रहे थें

खामोशियों की आवाज़ तेज़ होते जा रही थी कि आखिर क्युं सम्पुर्ण जीवन अपने सन्तानो पर न्योछावर कर देने वाले माँ-बाप को उसके ही सन्तान उनके बचे हुए जीवन के कुछ पल को भी सहेज नहीं सकते।

आखिर क्युं??

आखिर क्युं???

 

©पूजा यादव, बिहार सरीफ

 

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