मध्य प्रदेश

प्राइवेट स्कूल संचालक पहुंचे हाईकोर्ट की शरण में, 5वीं-8वीं की बोर्ड परीक्षा स्थगित करने की मांग, बोले- बच्चे तनाव में …

भोपाल। 5वीं एवं 8वीं की बोर्ड परीक्षा स्थगित करने की मांग को लेकर निजी स्कूल संचालक हाईकोर्ट की शरण में पहुंच गए हैं। इन निजी स्कूल संचालकों ने हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर की है। इसमें इस साल यह परीक्षा स्थगित कर बोर्ड की परीक्षा अगले शैक्षणिक सत्र से करने की मांग की है। इस मामले में हाईकोर्ट बुधवार को सुनवाई करेगा।

नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू हुआ था। उस दौरान पांचवीं एवं आठवीं की परीक्षा लोकल थी, लेकिन सितंबर महीने में राज्य सरकार ने दोनों परीक्षा बोर्ड करने के आदेश जारी कर दिए। बीच सत्र में अचानक से परीक्षा बोर्ड करने बच्चों पर मानसिक दबाव आ गया है। इसको लेकर मप्र प्रांतीय अशासकीय शिक्षण संस्था संघ ने हाईकोर्ट की शरण ली है। याचिका में कोर्ट से गुहार की है कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद सरकार ने कक्षा पांचवीं एवं आठवीं की बोर्ड परीक्षा करने के आदेश जारी किए हैं।

वहीं, दो साल से कोरोना के चलते ऑनलाइन पढ़ाई हुई। ऐसे में बीच सत्र में बोर्ड परीक्षा घोषित करने से बच्चे मानसिक दबाव में आ गए हैं। इससे इस साल बोर्ड की परीक्षा निरस्त कर अगले साल से लागू की जाए। मप्र प्रांतीय अशासकीय शिक्षण संस्था संघ के प्रदेश अध्यक्ष दीपेश ओझा ने बताया दो साल से लगातार कोरोना था। इससे बच्चों ने ऑनलाइन पढ़ाई की। इस साल नया शैक्षणिक सत्र अप्रैल से शुरू हुआ। तब तक पांचवीं एवं आठवीं कक्षा की परीक्षा बोर्ड नहीं थी। इसके बाद बोर्ड की कर दी। इससे बच्चों में बोर्ड परीक्षा का भय आ गया है और बच्चे मानसिक दबाव में हैं। इसलिए दोनों कक्षाओं की बोर्ड परीक्षा स्थगित कर अगले शैक्षणिक सत्र से लागू की जाए।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007-08 तक पांचवीं एवं आठवीं की परीक्षा बोर्ड थी। इसके बाद आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) लागू होने के बाद परीक्षा बंद कर वार्षिक मूल्यांकन शुरू कर दिया। अब फिर से राज्य शासन ने पांचवी एवं आठवीं की परीक्षा बोर्ड की कर दी। प्रदेश के निजी स्कूलों में दोनों कक्षाओं में दस लाख से ज्यादा बच्चे अध्ययनरत हैं। इसमें पांचवीं में 5 लाख 33 हजार 294 और आठवीं में 5 लाख 46 बच्चे दर्ज हैं। इन सभी बच्चों को इस साल बोर्ड की परीक्षा देनी होगी।

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