मध्य प्रदेश

सुपर फास्ट सरकार का सुपर फास्ट पैसला…. आधी रात को एजेंडा पहुंचा और अगले ही दिन मिली कैबिनेट की मंजूरी …

भोपाल। महाकाल की नगरी उज्जैन में दो दिन पहले हुई कैबिनेट की बैठक में यदि 17 हजार 972 करोड़ की समूह जल वितरण योजनाओं को मंजूरी नहीं मिलती तो ये सभी अटक जातीं। हुआ कुछ ऐसा कि 26 सितंबर की रात पीएचई के अफसरों ने सरकार को बताया कि यदि हमने 30 सितंबर से पहले सामूहिक जल वितरण के प्रोजेक्ट मंजूर नहीं किए तो केंद्र 9000 करोड़ ग्रांट रोक देगा और हमारे हाथ से 17972 करोड़ के प्रोजेक्ट निकल जाएंगे। केंद्र की 30 सितंबर डेडलाइन थी।

कैबिनेट बैठक के ठीक एक दिन पहले देर रात वित्त विभाग ने इस पर आनन-फानन में राय दी। आधी रात को मुख्य सचिव के पास कैबिनेट का एजेंडा पहुंचा। फिर एजेंडे की फोटोकॉपी हुई और वो बैठक में उज्जैन पहुंचा। आधी फोटो कॉपी मंत्रालय में हुईं और बाकी तो उज्जैन के रास्ते में कराई गई। इस योजना का प्रस्ताव वित्त की राय के लिए अटका था। ये केंद्र और राज्य के 50-50% फंड पर चलती है। पिछली बार भी इस योजना के प्रोजेक्ट को मंजूर करने के लिए वित्त की राय में 6 महीने लग गए थे।

22 जिलों की 23 नई समूह जल वितरण योजनाओं को कैबिनेट ने मंगलवार को मंजूरी दी है। इस पर 17,972 करोड़ खर्च होंगे। इस योजना से 9,197 गांवों को पानी मिलेगा। इस पर हड़बड़ी में वित्त से राय ली गई जो कई पन्नों की थी। फिर कैबिनेट के एजेंडे के साथ अलग से वित्त की राय उज्जैन रवाना हुई।

कैबिनेट की बैठक में चूंकि महाकाल कॉरीडोर का नामकरण ‘महाकाल लोक’ से हुआ है, लिहाजा लगे हाथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शिप्रा के शुद्धिकरण और दूषित पानी को रोकने की योजना का भी जिक्र कर दिया और उसे मंजूरी दे दी गई, जबकि इसका कोई एजेंडा या कागज कैबिनेट की टेबल पर नहीं थे।

पानी की पाइप लाइन डालने से पहले इन 9000 गांवों में पानी के स्रोत बनाने हैं। इसके बाद ही पाइप लाइन डालने का काम होगा। जुलाई के महीने में राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया था, जिसके बाद अब इस पर तेजी से काम होगा।

 

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