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“किल कोरो ना” अभियान में मिली कामयाबी, एकजुट होकर काम करने का भी किया उदाहरण पेश …

आदिवासी बहुल क्षेत्रों में एकता परिषद ने किया बेमिसाल काम

 

कोरो ना की दूसरी लहर के दौरान एकता परिषद के कार्यकर्ताओं ने देश के खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में जागृति,राहत और टीकाकरण के सघन अभियान चला कर बेमिसाल उपलब्धि हासिल की है। हालांकि एकता परिषद के कार्यकर्ता बरसों से आदिवासियों, वंचितों और दलितों के हक के लिए संघर्ष करते आए हैं। अब जबकि पूरे देश में कोरो ना महामारी फैल गई है तो वे कोरो ना की पहली लहर से ही सक्रिय रहे हैं। पहली लहर के दौरान लॉक डाउन में जब ग्रामीण क्षेत्रों में  अनाज सहित अन्य जरूरी वस्तुओं के लाले पड़ गए थे तो एकता परिषद के कार्यकर्ताओं ने उनकी राहत के लिए रात दिन एक कर दिया था और उन्हें अनाज सहित अन्य जरूरी वस्तुएं मुहैया कराई थी। साथ ही शहरों से गांवों में वापस लौट आए प्रवासी श्रमिकों के लिए श्रमदान अभियान चला कर उनकी आजीविका भी सुनिश्चित की थी। देश के 11 राज्यों में श्रमदान का अभियान बहुत अनूठा रहा। इससे जहां श्रमिकों को काम मिला वहीं गांवों के तालाब और नदियों की खुदाई व सफाई कर पर्यावरण संरक्षण का रास्ता प्रशस्त करने के साथ भविष्य के लिए रोजगार के रास्ते भी खुले। यहां यह उल्लेखनीय है कि तब ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी एजेंसियां भी सक्रिय नहीं थीं। लेकिन एकता परिषद के कार्यकर्ता अनेक मुश्किलों का सामना करते हुए भी ग्रामीणों खासकर आदिवासियों, दलितों और वंचितों की मदद के लिए हमेशा खड़े रहे। एकता परिषद का नेतृत्व और उनके कार्यकर्ता जिन वर्गों के लिए बरसों से संघर्ष कर रहे हैं, वे सचमुच में सरकारी उदासीनता और उपेक्षा के शिकार रहे हैं। अभी उनके हक दिलाने और जीवन को और आसान बनाने की कोशिश की जा रही थी कि कोरो ना जैसी विपदा सामने अा गई। पहली लहर में जिस तरह से शहरों से पलायन कर भारी संख्या में प्रवासी श्रमिक गांवों में लौट आए थे तब उनके संकट के समाधान के लिए एकता परिषद ने जिस तरह से लोगों को राहत पहुंचाई,वह सराहनीय है।

अब जबकि पूरे देश में हाहाकार मचा है। इस साल का मई महीना सबसे अधिक घातक साबित हुआ है। वर्ल्डं मीटर के आंकड़े के मुताबिक 30 अप्रैल 2021 तक देश में कोरो ना से कुल 2,11,835 मौतें दर्ज की गई थीं, जो 29 मई, 2021 तक बढ़ कर 3,25,972 हो गई। दुनिया में 32 फीसद मौतें केवल भारत में हुई। इस बढ़ोतरी से पूरा देश दहल गया है। देश ने देखा कि लोग किस तरह दवा, ऑक्सीजन के अभाव में मुफ्त में मर गए। उनका घर परिवार तबाह हो गया। बच्चे अनाथ हो गए।

दूसरी लहर के भयावह परिदृश्य में सरकारें भी लोगों की मदद में खुल कर आईं। एकता परिषद ने भी सरकारी एजेंसियों को मदद कर मिसाल कायम की। मध्य प्रदेश, झारखंड, असम, केरल, ओडिशा, मणिपुर, बिहार, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्यों में एकता परिषद ने दूर दराज और दुर्गम आदिवासी बहुल इलाके में किल कोरो ना अभियान चला कर शत प्रतिशत टीकाकरण को सुनिश्चित किया। साथ ही राहत बतौर ग्रामीणों को खाद्य सामग्री और दवाइयां भी उपलब्ध कराई गई। एकता परिषद और उनकी सहयोगी संस्थाओं की यह कोशिश लोगों को तीसरी लहर से बचाने में सहायक साबित होगी। यह ज़िक्र करना उचित ही होगा कि ऐसे समय में स्थानीय मीडिया ने पर्याप्त कवरेज कर कोरो ना की मुश्किलों को सामने लाया। साथ ही एकता परिषद ने एकता कॉविड संदेश निकला ताकि कार्यकर्ता एक दूसरे के काम को जान सके और एक दूसरे के बेहतर प्रयासों का अनुकरण कर सके।

एकता परिषद के कार्यकर्ताओं के मुताबिक आदिवासी बहुल क्षेत्र में टीकाकरण आसान काम नहीं था। पर लंबे समय से उनसे जुड़े रहने के कारण एकता परिषद के कार्यकर्ता उन्हें जागरूक कर फलस्वरूप टीका लगवाने को तैयार कर सके। हालत ऐसी थी कि अनेक गांवों में जब ग्रामीणों को भनक मिलती कि शहर से कोरो ना वाले अा रहे हैं तो स्त्री पुरुष और बच्चे जंगलों में छिप जाते थे। ऐसी परिस्थिति में एकता परिषद के कार्यकर्ता ही उन्हें टीका के लिए राजी करने में कामयाब हो पाते थे। ऐसी स्थिति अनेक गांवों में देखने को मिली।

एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रन सिंह परमार के नेतृत्व में एकता परिषद और उनकी सहयोगी संस्थाओं ने देश के मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित अन्य 11 राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता रथ निकाला गया। ऐसा प्रयोग एकता परिषद ने ही अपने कार्य क्षेत्र में किया। जागरूकता के लिए गीत गाने के साथ सैकड़ों गांवों में दीवार लेखन भी किए गए। एकता परिषद के कार्यकर्ताओं ने गांव गांव जा कर ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच करवाई। उनके बीच दवाओं का वितरण किया। जागरूकता रथ के जरिए ग्रामीणों को कोरो ना टीका लगवाने,मास्क पहनने और परस्पर दैहिक दूरी बनाए रखने के लिए सतर्क किया। साथ ही गांव गांव का आकलन कर जगह जगह आइसोलेशन केंद्र भी खोल गए। विभिन्न जगहों पर ऑक्सीजन मशीन भी वितरित किया गया। और हर जगह सरकारी स्वस्थकरमियों को भी उनके कार्य को अंजाम तक पहुंचाने में मदद की।

 

©प्रसून लतांत                                                                     

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