इकोनॉमी
भारत विश्व शिखर पर निखरेगा….
मानव मुक्ति का स्वर प्रखर होगा
भारत विश्व पटल पर शिखर होगा
प्राचीर अज्ञानता के टूटेंगे
उत्कर्ष से भरा प्रहर होगा।
वेदना प्रतिध्वनि बनकर नहीं लौटेगी
जन-जन की संवेदना का भी सम्मान होगा
राष्ट्रीय गीत मन के भावों में गूंजेगी।
राष्ट्रीय ध्वज गगन में जाकर लहराया जाएगा
वह दिन भी आएगा।
भारत विश्व पटल पर शिखर कहलाएगा
हरा-भरा मधुबन होगा
वन सघन होगा
अनुभूत सत्य का आख्यान होगा
शिक्षा का स्थान-स्थान पर व्याख्यान होगा
रोज डरते, रोज गढ़ते हताशा से दूर होंगे सपने
ज्वाला के तीव्र दहन
में छिपे हैं अपने।
शब्दों के अर्थों में नहीं कोई अंतर होगा।
न ही कोई कातर होगा।
दरके दर्पणों को फिर से जोड़ा जाएगा
वो दिन भी आएगा
कहीं भी चटकने का निशान न होगा
भारत पुन: महान होगा
जन-जन का सममान होगा
धर्म नहीं देश पूजा जाएगा
राष्ट्र देवालय कहलाएगा।
वह दिन भी आएगा।
©दोलन राय, औरंगाबाद, महाराष्ट्र

















