छत्तीसगढ़बिलासपुर

1936 की औषधालय बिल्डिंग, 130 साल पुरानी कोतवाली होगी संरक्षित, थाना स्मार्ट होगा, 30 करोड़ होंगे खर्च…

बिलासपुर । स्मार्ट सिटी प्रबंधन थाना भवन की भव्यता को बरकरार रखते हुए स्मार्ट थाना बनाएगा। यानी थाने को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। शहर के पहचान चिन्हों में शुमार कोतवाली बिल्डिंग के साथ जमाने भर की यादें जुड़ी हुई हैं।

बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने सहूलियत के लिए विरासत के साथ कोई समझौता नहीं करने का निर्णय लिया है। यानी कोतवाली परिसर में मल्टीलेवल पार्किंग बनेगी पर 130 साल पुरानी कोतवाली बिल्डिंग के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होगी।

1952 में जब अरपा उफान पर थी, तब दो दिनों तक कोतवाली सहित तटवर्ती कई मोहल्लों में पानी भर गया था। कोतवाली की ऊंचाई सतह से 5 फुट ऊंची है, इसलिए लोगों को रेस्क्यू कर यहीं रखा गया। बाढ़ का पानी 24 घंटे बाद उतरा, तब तक लोग यहीं ठहरे रहे।

वहीं दूसरी ओर कोतवाली के सामने स्थित दानवीर पं. देवकीनंदन दीक्षित द्वारा औषधालय के लिए दान में दी गई बिल्डिंग का भी धरोहर के रूप में संरक्षण किया जाएगा। पं. देवकीनंदन दीक्षित औषधालय 1936 में बना।

चार दशक पहले तक यहां रसायनशाला हुआ करती थी। पीछे खाली पड़ी जमीन पर जड़ी, बूटियां उगाई जाती थी। मूलत: यह आयुर्वेदिक औषधालय रहा है, जहां आज भी इसी पद्धति से लोगों का इलाज किया जाता है।

देवकीनंदन दीक्षित औषधालय के पीछे पीपीपी मॉडल पर सिटी हैल्थ एंड मेडिकेयर कांप्लेक्स का निर्माण किया जाएगा। यहां आम लोगों को किफायत दर पर सुपर स्पेशियालिटी अस्पताल की तरह जांच व उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। स्मार्ट सिटी द्वारा इसके लिए 10.83 करोड़ की लागत से अस्पताल भवन का निर्माण किया जाएगा।

सन् 1892 में अंग्रेजी हुकूमत के समय कोतवाली बिल्डिंग बनी और इसमें कचहरी लगती थी। 1903 में इसे पुलिस विभाग को दिया गया और तब से यह कोतवाली थाने के रूप में संचालित है। शहर का यह सबसे पुराना थाना है। इसके बाद बाकी थानों का निर्माण हुआ। बंदियों को रखने के लिए बंदी गृह भी उसी समय बनाया गया, जो आज भी वैसा ही है।

औषधालय हो या कोतवाली बिल्डिंग शहर के स्मारक हैं। इन धरोहरों को हेरिटेज बिल्डिंग के रूप में संरक्षित किया जाएगा। कोतवाली परिसर में 19.98 करोड़ की लागत से मल्टीलेवल पार्किंग बनेगी। इसमें बेसमेंट के अतिरिक्त फ़र्स्ट और सेकंड फ्लोर पर पार्किंग तथा ग्राउंड फ्लोर में व्यवसायिक दुकानों का निर्माण किया जाएगा, ताकि इसकी आय से वहां पुलिस क्वार्टर का निर्माण किया जा सके। सिटी डिस्पेंसरी यथावत रहेगी। इसके साथ कोई तोड़फोड़ नहीं होगी।

कुणाल दुदावत, एमडी, स्मार्ट सिटी

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