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विध्यांचल पर्वत जहां ओमकारेश्वर महादेव विराजमान हैं …

नर्मदा परिक्रमा भाग- 10

 

अक्षय नामदेव। ओमकारेश्वर में 23 मार्च 2021 दिन मंगलवार को हम सुबह जल्दी स्नान कर तैयार हो गए तथा सुबह 6:00 बजे हम नर्मदा तट पर पहुंच गए। हम नर्मदा के दक्षिण तट की परिक्रमा पर थे और ओमकालेश्वर मंदिर नर्मदा के उत्तर तट पर स्थित है इसलिए हम ओमकारेश्वर मंदिर जाकर दर्शन नहीं कर सकते थे क्योंकि नर्मदा नदी को पार करने पर परिक्रमा की मर्यादा का उल्लंघन हो जाता है। हमने नर्मदा के दक्षिण तट से ही भगवान ओमकारेश्वर का ध्यान किया और उन्हें प्रणाम करते हुए मां नर्मदा की परिक्रमा निर्विघ्न संपन्न हो का आशीर्वाद मांगा – हे भोलेनाथ नर्मदा परिक्रमा पूर्ण होने पर हम आप पर जल चढ़ाने आ सके ऐसी शक्ति देना। दरअसल ओमकारेश्वर तीर्थ नर्मदा तट पर इस तरह स्थित है की परिक्रमा के दौरान यहां पहुंचने पर नर्मदा परिक्रमा खंडित हो जाती है। पूरी नर्मदा परिक्रमा पूर्ण होने के पश्चात ही अलग से ओम्कारेश्वर तीर्थ में नर्मदा जल लेकर चढ़ाने का विधान है। हमने नर्मदा के दक्षिणी तट से भगवान ओमकारेश्वर की पूजा अर्चना के साथ मां नर्मदा का पूजन अर्चन किया।

यहां ओमकारेश्वर में मां नर्मदा काफी गहरी है। नर्मदा के दक्षिण तट पर बड़े सुंदर घाट बने हुए हैं। घाट पर सुंदर सुंदर नाव तीर्थ यात्रियों की प्रतीक्षा में खड़े थे पर यात्री नहीं थे। 23 मार्च को ओमकारेश्वर में लाक डाउन था इसलिए नर्मदा के तट पर गिनती के ही परिक्रमा वासियों की उपस्थिति थी। एक तीर्थयात्री ने आकर एक नाव वाले से कहा कि नर्मदा पारकर ओमकारेश्वर भोलेनाथ को जल चढ़ाने जाना है। नाव वाले ने कहा कुछ यात्री आ जाए तो ले चलूं। मुझे जल्दी जाना है यात्री ने कहा । तब नाव वाले ने कहा 50 रुपए लगेंगे,,,।भाव ताव होता रहा और बोहनी का समय है कह कर 20 रुपए में नाव वाले ने तीर्थयात्री को नर्मदा के उस पार पहुंचाने तैयार हो गया।  लॉकडाउन में  रोजमर्रा मेहनत कर जीवन यापन करने वाले लोगों पर किस तरह असर पड़ता है यह उसका उदाहरण था।

हम नर्मदा तट पर बैठकर काफी देर तक ओमकारेश्वर तीर्थ का दर्शन करते रहे फिर दक्षिण तट पर स्थित भगवान ममलेश्वर जी का दर्शन करने गए। ममलेश्वर तीर्थ नर्मदा के दक्षिण तट का प्रमुख तीर्थ है जो द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। मतलब नर्मदा के दक्षिण तट पर भगवान ममलेश्वर एवं उत्तर तट पर भगवान ओमकारेश्वर स्थित है यह दोनों ही तीर्थ द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल हैं जो तीर्थयात्री परिक्रमा पर नहीं होते उन्हें नर्मदा के उत्तर एवं दक्षिण दोनों तट के तीर्थ का दर्शन होता है। ओमकारेश्वर द्वीप ओम के आकार होने के कारण इसे ओमकारेश्वर तीर्थ का नाम दिया गया है।

नर्मदा तट पर खंडवा जिले का प्रमुख तीर्थ ओमकारेश्वर को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है। यहां नर्मदा के दोनों तट मिलाकर 100 से भी अधिक प्राचीन मंदिर एवं मूर्तियां स्थापित है। पूर्व दिशा से बह कराती हुई नर्मदा यहां अपने उत्तर तट पर विंध्याचल को काटकर एक दीप का निर्माण करती है । नर्मदा यहां आकर विंध्याचल से एक छोटे पर्वत खंड को अलग कर उसके चारों ओर लिपट जाती है इसी पर्वत खंड में ओमकारेश्वर स्थित है।ओमकारेश्वर पहाड़ के चारों तरफ नर्मदा का प्राकृतिक सौंदर्य देखने योग्य है यही कावेरी नदी आकर नर्मदा में मिलती है तथा नर्मदा दो धाराओं में बंट जाती है। ऐतिहासिक एवं पौराणिक नगरी ओमकारेश्वर पृथक से आकर कई दिनों तक नर्मदा तट पर रहकर दर्शन पूजन का लाभ लेने योग्य स्थान है।

नर्मदा तट का दर्शन पूजन कर पीछे मुड़ हम सीढ़ियों से चढ़कर भगवान ममलेश्वर का दर्शन करने के लिए पहुंच गए। ममलेश्वर पार्थिव लिंग है तथा शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर ओमकारेश्वर मंदिर की तरह ही पांच मंजिला है तथा प्रत्येक में शिवलिंग स्थित है यह मंदिर पंचायतन है इस के प्रांगण में छह अन्य मंदिर हैं इस तरह भगवान ममलेश्वर तीर्थ के अहाते में सात मंदिर हैं मंदिरों की दीवारों ,प्रवेश द्वारों तथा दीवारों पर विभिन्न आकृति की मूर्तियां हैं जिसमें बारीकी से कलाकारी की गई है। कहते हैं राजा विंध्याचल की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने सभी देवताओं के साथ यहां रहना स्वीकार किया इस तरह ममलेश्वर महादेव तीर्थ का बड़ा महत्व है। लॉकडाउन के कारण कोई भीड़ नहीं थी जिसका फायदा उठाते हुए हमने ममलेश्वर तीर्थ का खूब अच्छी तरह से दर्शन पूजन किया और बाद में फोटोग्राफी भी की। यहां नर्मदा तट से जाने की बिल्कुल इच्छा नहीं थी कई बार नर्मदा अष्टक एवं रुद्राष्टक का पाठ करने के बाद भी बार-बार नर्मदा अष्टक और रुद्राष्टक का पाठ करने की इच्छा होती रही।

नर्मदा तट के तीर्थों का दर्शन पूजन करने के पश्चात हमने अल्पाहार किया। अल्पाहार में उस क्षेत्र में पोहा जलेबी प्रचलित है वही हमने किया तथा वहां से आगे की परिक्रमा में निकल गए।

 

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