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नर्मदा और तवा नदी का संगम जिसे बांद्रा भान के नाम से लोग यहा जानते हैं …

नर्मदा परिक्रमा भाग- 24

अक्षय नामदेव। होलीपुरा के सतधारा से हम रवाना होकर लगभग 3:00 बजे बुधनी पहुंचे। जिला सीहोर का बुधनी स्थित नर्मदा तट काफी साफ सुथरा सुंदर है। यहां बुधनी के आसपास नर्मदा तट पर अनेक तीर्थ स्थल है जहां आप दर्शन पूजन कर सकते हैं।

नर्मदा तट पर स्थित बुधनी बुध ग्रह की तपोस्थली मानी जाती है। नर्मदा तट पर यहां तटवास , एवं पूजन करना अत्यंत फलदाई होता है यहां उपस्थित पुरोहित ने बताया कि जिन जातकों का बुध कमजोर होता है वह यहां बुधनी में नर्मदा स्नान कर पुण्य लाभ का प्राप्त कर अपना बुध मजबूत कर सकते हैं। होली का दिन होने के कारण बुधनी नर्मदा तट पर युवकों की टोलियां बड़ी संख्या में उपस्थित थी। दोपहर भर रंग खेलने के पश्चात युवक यहां स्नान करने आए थे। यहां नर्मदा तट पर पूजन के बाद हम भी तट पर बैठे इन युवकों की जल क्रीड़ा देखते रहे। होलीयाना माहौल के बावजूद भी बुधनी के युवक नर्मदा तट की मर्यादा का पूरा ध्यान रख रहे थे इस लिहाज से बुधनी मुझे नर्मदा तट का अत्यंत संस्कारित नगर लगा।

यहां नर्मदा तट दर्शन के बाद हमने तट पर ही से लगे एक पंडित जी की होटल से हरी चटनी एवं मट्ठे के साथ कचोरियां खाई। खूब आनंद आया। बुधनी से हम 4:30 बजे रवाना हो गए तथा नर्मदा तट बांद्राभान पहुंचे।

बांद्राभान नर्मदा एवं तवा नदी का संगम है। इस संगम के दर्शन पूजन का विशेष महात्मय है तवा नदी मध्य प्रदेश की प्रमुख नदियों में से एक है जो नर्मदा परिक्रमा वासियों को कई बार दर्शन देती है। इस तवा नदी का कई स्थानों पर इतना विकराल पाट है कि कई बार नर्मदा परिक्रमा वासियों को भ्रम हो जाता है कि कहीं यह नर्मदा नदी तो नहीं है? यही तवा नदी बांद्राभान के पास नर्मदा में मिलकर संगम का निर्माण करती है। हमने बांद्राभान पहुंचकर संगम का दर्शन पूजन किया तथा यहां काफी देर तक बैठे रहे।

बांद्राभान के बारे में कहा जाता है कि संगम तीर्थ का नाम बांद्राभान इसलिए पड़ा क्योंकि यहां के एक राजा की कुछ गलतियों के कारण संतो ने उसे श्राप दिया था जिसके कारण उसका मुंह बंदर के समान हो गया था। परेशान राजा को किसी ने युक्ति बताएं की नर्मदा तट पर तपस्या करने से इस बंदर मुंह से मुक्ति मिल सकती है तब राजा ने यहां संगम पर तपस्या की जिसके  फल स्वरुप राजा का मुंह फिर पहले जैसे हो गया और उसे बंदर मुख से मुक्ति मिल गई तब से तवा एवं नर्मदा नदी के इस संगम तीर्थ को बांद्राभान कहा जाता है।

बांद्राभान धार्मिक महत्त्व का स्थान होने के साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है यहां लोग बड़ी संख्या में नौका विहार एवं प्राकृतिक आनंद लेने के लिए आते हैं तथा दवा एवं नर्मदा नदी के संगम के विशाल स्वरूप का दर्शन करते हैं। प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा में यहां विशाल मेले का आयोजन होता है जिसमें मध्य प्रदेश के दूर-दूर से लोग इस मेले में पहुंचते हैं।

क्रमशः

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