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भारत की संस्कृति व त्योहार के संरक्षण के लिए प्रदेश की नवाचारी शिक्षिका प्रज्ञा सिंह व आशा उज्जैनी ने बाल चौपाल का किया आयोजन …

बिलासपुर । भारत की संस्कृति एवं त्योहार के संरक्षण के लिए प्रदेश की नवाचारी शिक्षिका प्रज्ञा सिंह (दुर्ग) और आशा उज्जैनी (बिलासपुर) के द्वारा विभिन्न प्रयास इस कोरोना काल में लगातार ऑनलाइन क्लास के माध्यम से किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अक्षय तृतीया पर बाल चौपाल आयोजित की गई। जिसमें विशेष आकर्षण नानी की कहानी थी।

इस कार्यक्रम का आनंद प्रदेश के विभिन्न जिलों के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उठाया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रतिभा त्रिपाठी (बालोद), स्नेहलता टोप्पो (सरगुजा)एवं दीप्ति दीक्षित (बिलासपुर) रहे विशेष अतिथि के रूप में नानी वंदना ठाकुर (दुर्ग) मामी निष्ठा ठाकुर (दुर्ग), शिक्षक रामकुमार वर्मा (दुर्ग) रहे सभी ने अक्षय तृतीया पर रोचक जानकारी दी कार्यक्रम का प्रारंभ प्रज्ञा सिंह के द्वारा किया गया। परशुराम जयंती अक्षय तृतीया पर अपने विचार के साथ आशा उज्जैनी के द्वारा कार्यक्रम का संचालन किया गया. कार्यक्रम के अतिथि प्रतिभा त्रिपाठी के द्वारा परशुराम जयंती एवं अक्षय तृतीया पर बहुत ही सुंदर कविता प्रस्तुतीकरण किया गया।

स्नेह लता टोप्पो के द्वारा सुमधुर स्वर में कविता प्रस्तुतीकरण की गई जिसमें कोरोना काल में अक्षय तृतीया एवं परशुराम जयंती के बारे में बताया गया। दीप्ति दिक्षित के द्वारा भारत देश व छत्तीसगढ़ में शहर, गांव के घरों में किस तरह अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। उसकी कहानियां बताई . नानी वंदना ठाकुर ने अक्षय तृतीया एवं परशुराम जयंती पर विस्तार पूर्वक चर्चा की, उन्होंने बताया कि इस दिन ही महाभारत युद्ध की समाप्ति हुई थी और इसी दिन सत्यवान और सावित्री का भी विवाह हुआ था उन्होंने वट सावित्री की कथा भी सुनाई कि किस तरह से सावित्री ने अपने पति के प्राणों की रक्षा की थी, निष्ठा ठाकुर ने गुड्डा गुड़िया का मंडप सजाया और उनकी शादी विधि विधान से की, घडा़ दान का महत्व भी बताया।

राम कुमार वर्मा ने बताया कि आदिवासी अंचलों में इस दिन खेती के लिए अपने घरों से अनाज के देवी-देवताओं को अर्पित कर खेतों बोनी शुरू करते हैं। बस्तर में माटी जगाया होता है एवं अक्षय तृतीया के पर्व पर गुडडे, गुड़ियों की शादी क्यों रचाई जाती है इस बात पर अपने विचार प्रस्तुत किए. बहुत ही मनोरंजक एवं जानकारी वर्धक क्लास में पूरे छत्तीसगढ़ के सभी क्षेत्रों के शिक्षक एवं बच्चे शमिल हुए.पूर्व में भी नानी के द्वारा हरेली त्योहार पर कहानी बच्चों ने बहुत पसंद की थी, इसी कड़ी में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

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