
पीएफआई नेताओं के एनकाउंटर का डर, बचाव पक्ष ने कोर्ट के सामने जताई आशंका, आरोपियों के वकील ने कहा- देश में गाड़ी पलट जाती है, जज बोले-अपने प्रदेश में ऐसा नहीं होता ….
भोपाल। एनआईए द्वारा इंदौर और उज्जैन से गिरफ्तार किए गए पीएफआई के चारों लीडर्स को कोर्ट भोपाल में पेश किया। कोर्ट ने चारों को 7 दिन (30 सितंबर) तक एनआईए को सौंप दिया है। एनआईए ने कोर्ट में रिमांड के लिए दलील दी कि आरोपियों से पूछताछ करनी है, सबूत जुटाने हैं। इनके पास से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, देश विरोधी दस्तावेज और डिजिटल दस्तावेज बरामद हुए हैं। आरोपियों का मकसद समुदाय विशेष के युवाओं को भड़काकर देश में कट्टरता पैदा करना था। भारत में इस्लामिक शरिया कानून कायम करने के एजेंडे के तहत यह अभियान में जुटे थे।
एनआईए कोर्ट में विशेष न्यायाधीश रघुवीर प्रसाद पटेल के समक्ष रिमांड को लेकर सुनवाई हुई। आरोपियों की ओर से वरिष्ठ वकील अतहर अली ने पक्ष रखा। अली ने कोर्ट से पूछा- हमारे मुवक्किल को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया है? इस पर एनआईए के वकील ने कहा कि आरोपियों के पास से देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के सबूत मिले हैं। आरोपियों के वकील ने पूछा- इन्हें कहां रखा जाएगा। कोर्ट ने कहा कि अभी भोपाल में, पूछताछ के लिए जरूरत पड़ी तो बाहर भी ले जाया जा सकता है। इस पर अतहर अली ने अपने मुवक्किलों की सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा कि देश में गाड़ी पलट जाती हैं। इनके सुरक्षा के क्या इंतजाम रहेंगे। इस पर जज ने कहा- अपने प्रदेश में ऐसा नहीं होता, आप बेफिक्र रहिए। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश रघुवीर प्रसाद पटेल ने चारों आरोपियों को 30 सितंबर तक एनआईए को रिमांड पर सौंपने का आदेश दिया।
बताया जाता है रिमांड अवधि में एनआईए आरोपियों को किसी गुप्त स्थान पर रख सकती है। जहां से जरूरत पड़ने पर इन्हें कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड लेकर दिल्ली या अन्य स्थान पर भी ले जा सकती है। उल्लेखनीय है कि गुरुवार को एनआईए ने इंदौर से पीएफआई के प्रदेशाध्यक्ष अब्दुल करीम बेकरीवाला, अब्दुल जावेद और मुमताज कुरैशी तथा उज्जैन से जमील शेख को गिरफ्तार करने के बाद शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया। इनके पास से संदिग्ध और भड़काऊ दस्तावेज भी जब्त किए हैं। आरोपियों को जब एनआईए ट्रेवलर में लेकर कोर्ट पहुंची तो मीडिया ने उन्हें घेर लिया। हालांकि, एनआईए सीधे उन्हें कोर्ट लेकर गई।
एनआईए आरोपियों को भारी सुरक्षा के साथ शुक्रवार सुबह 11 बजे कोर्ट लेकर पहुंची। उन्हें सीधे एनआईए कोर्ट ले जाया गया। कागजी कार्रवाई चल ही रही थी कि अचानक कोर्ट रूम की बिजली बंद हो गई। इससे करीब आधा घंटे तक सुनवाई प्रभावित हुई। इस दौरान एनआईए की टीम आरोपियों को चेहरे पर नकाब डालकर बैठाए रखी। उनके आसपास भी किसी को आने-जाने की इजाजत नहीं थी। उनका पक्ष रखने कई वकील पहुंचे, लेकिन आरोपी सबको मना करते रहे। वह कहते रहे कि हमने वकील कर लिया है। आपकी जरूरत नहीं है।
एनआईए और ईडी ने देशभर में पीएफआई के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। 15 राज्यों से पीएफआई से जुड़े कुल 106 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें संगठन प्रमुख ओमा सालम भी शामिल है। मध्यप्रदेश के इंदौर से पीएफआई के तीन और उज्जैन से एक सदस्य को एनआईए के इनपुट पर गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई में एनआईए समेत प्रदेशों की सुरक्षा एजेंसियों के करीब 200 अधिकारी शामिल रहे। जांच एजेंसियों ने यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, असम, महाराष्ट्र, बिहार, मध्यप्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान सहित अन्य राज्यों में की है।
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का गठन 17 फरवरी 2007 को हुआ था। यह संगठन दक्षिण भारत में तीन मुस्लिम संगठनों का विलय करके बना था। इनमें केरल का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु का मनिथा नीति पसराई शामिल थे। बताया जाता है कि सिमी पर प्रतिबंध लगने के बाद सिमी से जुड़े लोग भी इसमें शामिल हो गए थे। इस वक्त देश के 23 राज्यों में इस संगठन के सक्रिय होने की सूचनाएं हैं।
एनआईए ने पीएफआई के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल करीम बेकरीवाला पिता अब्दुल रहीम अब्बासी, जनरल सेक्रेटरी अब्दुल खालिद पिता अब्दुल कयूम और प्रदेश कोषाध्यक्ष मोहम्मद जावेद पिता मोहम्मद साबिर को इंदौर तथा संगठन के प्रदेश सचिव जमील शेख पिता अब्दुल अजीज को उज्जैन से गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी ने चारों के खिलाफ धारा-121ए,153ए, 120बी, विधि विरूद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 1967 की धारा 13(1)(बी), धारा 18 के तहत अपराध कायम किया है।















