
7.3% की दर से बढ़ेगी भारत की GDP, इंफ्रा खर्च और निजी खपत से मिलेगी मजबूती: ADB का बड़ा दावा
पश्चिम एशिया से कर्मचारियों द्वारा धन कम भेजे जाने और ऊर्जा आयात की कीमत अधिक होने के कारण वित्त वर्ष 2026 के दौरान चालू खाते का घाटा बढ़ने का अनुमान है। तेल की कीमतें स्थिर होने और निर्यात के गति पकड़ने और 728.5 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार के समर्थन से वित्त वर्ष 2027 में चालू खाते का घाटा कम होने की संभावना है।
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के अपने अनुमान को 80 आधार अंक बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। दिसंबर में एडीबी ने 6.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया था। बहुपक्षीय बैंक ने सुधारों, यूरोप के साथ एक व्यापार समझौते और सरकारी वेतन वृद्धि की उम्मीदों का हवाला देते हुए कहा है कि इससे लचीली अर्थव्यवस्था में घरेलू खर्च को बढ़ावा मिलेगा।
एडीबी ने अपने अप्रैल 2026 के एशियन डेवलपमेंट आउटलुक में कहा कि मजबूत निजी खपत, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर खर्च और कॉरपोरेट बैलेंस शीट में सुधार की वजह से भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा।
बहरहाल इसने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध जैसे भूराजनीतिक तनावों और ऊर्जा की अधिक कीमतों, वित्तीय स्थिति कमजोर होने और कम बाहरी मांग के कारण अर्थव्यवस्था के नीचे की ओर जाने का जोखिम भी है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘वित्त वर्ष 2027 में वृद्धि में उल्लेखनीय सुधार होगा क्योंकि सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में वृद्धि और प्रमुख नियामक सुधारों से निवेश में वृद्धि के कारण घरेलू मांग मजबूत होगी। यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, जिससे बाहरी मांग मजबूत होने की उम्मीद है।’
संशोधित पूर्वानुमान में पश्चिम एशिया संघर्ष से तेल की ऊंची कीमतों जैसे बाहरी दबावों के बावजूद निजी खपत, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर खर्च और कॉरपोरेट बैलेंस शीट में सुधार से स्थायी गति को रेखांकित किया गया है। वैश्विक रूप से प्रतिकूल स्थिति और निर्यात की रफ्तार में कमी के कारण वित्त वर्ष 2026 में वृद्धि दिसंबर 2025 में अनुमानित 7.2 प्रतिशत से कम होकर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 2025 से अब तक मौद्रिक नीति में ढील दिए जाने और नीतिगत दर में 125 आधार अंक की कटौती किए जाने से हुए ऋण विस्तार का भरोसा वित्त वर्ष 2027 के वृद्धि अनुमान में नजर आ रहा है। पिछले साल के बजट में कर में कटौती किए जाने से निजी खपत सामान्य होने की उम्मीद है, हालांकि खाद्य और पेट्रोलियम की महंगाई इसके लाभ को कम कर सकती है।
महंगाई दर को लेकर एडीबी ने अनुमान लगाया है कि कच्चे तेल और गैस के आयात की कीमत अधिक होने, रुपये के कमजोर होने और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में बदलाव के कारण वित्त वर्ष 2026 में महंगाई दर बढ़कर 4.5 प्रतिशत पर पहुंचेगी और उसके बाद वित्त वर्ष 2027 में घटकर 4 प्रतिशत रह जाएगी।

















