मध्य प्रदेश

मिशन 2023 : कमलनाथ ने कांग्रेस नेताओं को लगाई फटकार, बोले- पार्टी-संगठन के लिए समय नहीं तो अभी बता दो, तत्काल बदलाव करेंगे ….

भोपाल। मध्य प्रदेश में होने वाले 2023 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में दोनों ही मुख्य दल कांग्रेस और भाजपा लग चुके हैं। दोनों ही दलों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है और अपने संगठन को मजबूत बनाने के लिए रणनीति बनाना भी शुरू कर दिया है। इसी के चलते भोपाल के पीसीसी मुख्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई।

कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संगठन को मजबूत करने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। हाल ही में हुए नगरीय निकाय के चुनाव में कांग्रेस को 5 नगर निगमों में मिली कामयाबी के बाद अब जमीनी स्तर पर संगठन की मजबूती के प्रयास तेज हो गए हैं। पीसीसी चीफ कमलनाथ ने जमीनी स्तर पर कांग्रेस के संगठन को खड़ा करने की कमान अपने हाथ में ली है।

वे विधायकों और व्यक्ति विशेष के बजाए संगठन की कमान जिला प्रभारियों और सह प्रभारियों के हाथों में सौंपना चाहते हैं। विधायकों से जिलाध्यक्षों का प्रभार वापस लेकर फुल टाइम वर्कर को जिला कांग्रेस कमेटी की कमान सौंपी जा रही है।

कमलनाथ ने कांग्रेस के जिला प्रभारियों, सह प्रभारियों और जिलाध्यक्षों को फटकार लगाते हुए स्पष्ट कहा कि यदि आपके पास पार्टी और संगठन के लिए समय नहीं है तो अभी बता दो। ऐसे पदों पर हम अपने दूसरे मेहनती लोगों को मौका देंगे। आप से बेहतर तो बाल कांग्रेस काम कर रही है, उनमें ज्यादा उत्साह नजर आता है। यह नसीहत पीसीसी चीफ कमलनाथ ने भोपाल में प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक में कही। बैठक में विधायकों, विधानसभा, लोकसभा, मेयर के पूर्व प्रत्याशी, जिला प्रभारी, सह प्रभारी के अलावा प्रकोष्ठों के अध्यक्ष भी शामिल हुए।

बैठक में कमलनाथ ने कहा कि दो सौ गाड़ियों का काफिला लेकर भोपाल आने वाले नेताओं को जमीन पर संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। कारों के काफिले से नहीं जमीन पर काम करने से जीत मिलेगी। अगले साल विधानसभा के चुनाव हैं, ऐसे में हवाबाजी नहीं, जमीन पर काम करने की जरूरत है उसी से कामयाबी मिलेगी। बैठक में पीसीसी चीफ कमलनाथ ने विधायकों को भी संगठन के कामों पर ध्यान देने की नसीहत दी।

निकाय चुनाव में गड़बड़ी करने वाले और निष्क्रिय जिलाध्यक्षों की छुट्‌टी हो सकती है। पीसीसी से मिली जानकारी के मुताबिक करीब 10 जिलों के जिला अध्यक्षों को बदला जा सकता है। प्रदेश स्तर से जारी होने वाले संगठन के कामों में ढ़ील बरतने वाले जिलाध्यक्षों को बदलकर सक्रिय कार्यकर्ताओं को मौका दिया जा सकता है। इसके कुछ देर बाद दो विधायक बैठक से बाहर निकल गए।

दरअसल, 2018 में करीब 15 साल बाद मप्र में कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम लिया था। दलबदल के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस को कई क्षेत्रों में करारी हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस के संगठन की कमान व्यक्ति विशेष के बजाए विचारधारा वाले कार्यकर्ताओं के हाथ में देने के लिए कमलनाथ बदलाव कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि संगठन का काम कांग्रेस की विचारधारा वाले कार्यकर्ताओं को दिया जाए और बूथ से लेकर ब्लॉक, जिला स्तर के संगठन की कमान जिला प्रभारियों और सह प्रभारियों के हाथ में हो।

पीसीसी को मिली रिपोर्ट के मुताबिक कई कांग्रेस के नेताओं ने नगर पालिका, नगर परिषद और जनपद अध्यक्ष बनने के लिए अघोषित रुप से बीजेपी को समर्थन दे दिया। ऐसे नेताओं की रिपोर्ट भी पीसीसी को मिली है, जो बीजेपी नेताओं से करीबियां बढ़ा रहे हैं और भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। पीसीसी ने ऐसे कमल छाप कांग्रेसी नेताओं की भी जानकारी मंगाई है। बैठक में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविन्द सिंह, अजय सिंह ‘राहुल’, अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया समेत कांग्रेस के विधायक, जिलाध्यक्ष और जिला प्रभारी मौजूद रहे।

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