मध्य प्रदेश

39 साल से दिन में सिर्फ 2 कप चाय, अन्न का एक दाना नहीं खाया, 62 वर्ष की आयु में भी हैं सेहतमंद ….

इंदौर। आपको यह जानकर सहज ही विश्वास नहीं होगा कि कोई 39 साल से दिन में केवल दो बार चाय पीता हो, फिर भी 62 साल की उम्र में भी पूरी तरह स्वस्थ और ऊर्जावान हो। जी हां, हम बात कर रहे हैं एक ऐसी साध्वी की जो संयम, त्याग और संकल्प की जीती-जागती मिसाल हैं। नाम है साध्वी विमलयशा श्रीजी म.सा.। प्रवचन देने, विहार करने से भी उनके स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इस अनूठे तप के कारण ही वे जैन धर्मावलंबियों में चाय वाली म.सा. (महाराज साहब) के नाम से ख्यात हैं।

रामबाग दादावाड़ी में 18 वर्ष से निवास कर रहीं साध्वी विमलयशा ने 39 वर्षों से अन्न का एक दाना नहीं खाया है। वे दिन में सिर्फ दो चाय पीती हैं। इसके बावजूद वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। 62 वर्ष की आयु में भी उन्हें किसी तरह की शारीरिक बीमारी नहीं है पूरी तरह ऊर्जावान हैं। खाली पेट चाय पीते रहने से लोगों को अक्सर एसिडिटी की शिकायत हो जाती है, लेकिन उन्हें कभी इसकी भी शिकायत नहीं हुई। 14 मई 1975 को अक्षय तृतीया पर खरतरगच्छ संघ की दीक्षा लेने वाली विमलयशा श्रीजी मसा सुबह 7:30 बजे और 11:30 से दोपहर 12 बजे के बीच दूसरी कप चाय लेती हैं।

इसे संकल्प की शक्ति का चमत्कार बताते हुए वे कहती हैं कि संयम, त्याग ही जीवन का सबसे बड़ा संकल्प है। साधु जीवन तो त्यागमयी है, जितना त्याग करेंगे, उतना ही आगे बढ़ेंगे। मन भटकता तो है, लेकिन भटकते मन को रोकना भी अपने हाथ में होता है। जब तक मन नहीं मानता, तब तक कोई कार्य नहीं होता, लेकिन जब मन मान जाता है तो कठिन काम भी सध जाते हैं।

साध्वी का मेडिकल चेकअप करने वाले डॉ. मोदी के अनुसार साध्वी विमलयशा श्रीजी मसा 62 वर्ष की आयु में भी पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्हें कोई बीमारी नहीं है। उन्हें देखकर हैरानी होती है कि वे पूरा दिन सिर्फ दो कप चाय लेती हैं, फिर भी दिनभर ऊर्जावान रहती हैं।

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