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होलिका दहन में जल जाती हैं सभी बुराइयां …

रंगों के त्योहार होली की आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं और बधाइयां। दोस्तों यूं तो होली का त्योहार बैर, द्वेष बुलाकर एक हो जाने को ही प्राथमिकता देता है। इस दिन मान्यता है कि रंगों के साथ दुश्मन भी गले मिलकर दोस्त बन जाते हैं। कहीं इसे कृष्ण राधा के रास  के साथ जोड़ा जाता है, कहीं इसे शिव के भस्म स्नान से जोड़ा जाता है, परंतु आने वाली नई पीढ़ी को होली का मुख्य कारण बताना बहुत जरूरी है।

जैसी कि मान्यता है कि प्रहलाद नामक एक बालक हुआ करता था। वह भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था। उसके पिता हिरण्यकश्यप सर्व शक्तिशाली होते हुए स्वयं को ही ईश्वर की उपाधि देते थे। और प्रहलाद को भी उनकी ही पूजा करने को बाध्य करते थे। हिरण कश्यप की सभी बुराइयों में साथ देती थी उसकी बहन होलिका अर्थात प्रहलाद की बुआ।

अत्याचार की पराकाष्ठा में होलिका ने होली में प्रहलाद को गोद में बिठाकर अग्नि में प्रवेश का विचार बनाया, क्योंकि उसे वरदान था कि अग्नि उसे जला नहीं सकती। किंतु अग्नि में प्रवेश करते ही स्वयं होलिका पूरी तरह जल गई और प्रहलाद सुरक्षित बच गया। विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर हिरण कश्यप का भी बध कर दिया।

इस प्रकार उस युग की सभी बुराइयां होली के साथ जल गई और एक नए युग का प्रारंभ हुआ। होली खुशियों के साथ बुराइयों पर अच्छाई की विजय भी दर्शाती है। अपनी आने वाली पीढ़ियों को यह कहानी अवश्य सुनाएं और उन्हें नेक इंसान बन सकती राह पर चलना सिखाए।

 

©डॉ रश्मि दुबे, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश

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