मध्य प्रदेश

19वां वार्षिक आउटलुक ट्रैवलर अवार्ड्स: ‘मांडू’ बेस्ट हेरिटेज डेस्टिनेशन अवार्ड से सम्मानित …

भोपाल। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ‘मांडू’ को बेस्ट हेरिटेज डेस्टिनेशन के लिए आउटलुक ट्रैवलर जूरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आउटलुक ट्रैवलर द्वारा नई दिल्ली में आयोजित 19वें वार्षिक आउटलुक ट्रैवलर अवार्ड्स में पर्यटन निगम के प्रबंध संचालक एस. विश्वनाथन ने पुरस्कार ग्रहण किया। विश्वनाथन ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के हेरिटेज डेस्टिनेशन को यह अवार्ड मिलना अत्यंत ही गौरव का विषय है।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, पुरातात्विक धार्मिक एवं पर्यटन दृष्टि से समृद्ध है। मध्यप्रदेश पर्यटन द्वारा इन सभी महत्व के पर्यटन स्थलों के साथ ही प्रदेश के लोक संस्कृति, कला, हस्तशिल्प एवं खान-पान का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। संस्कृति और पर्यटन मंत्री, जी. किशन रेड्डी और पर्यटन मंत्री उत्तराखंड सतपाल महाराज तथा विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में आउटलुक ट्रैवलर अवार्ड्स दिया गया। इस वर्ष पुरस्कारों का निर्णय एक शोध एजेंसी द्वारा किए जा रहे एक यात्रा सर्वेक्षण तथा जूरी सदस्यों द्वारा प्रतिक्रियाओं की जांच के आधार पर किया गया।

 

‘मालवा का स्वर्ग’ के नाम से भी विख्यात है मांडू

पर्यटन और मध्यप्रदेश अब एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। इतिहास से लेकर वन्य जीवों के वासस्थलों के रूप में प्रसिद्द मध्यप्रदेश अपनी झोली में कई सारी ऐसी विरासतों को लिए हुए है, जो वैश्विक धरोहर में भी शामिल हैं। राजा-रानी के प्रेम का साक्षात् साक्षी प्राचीन शहर मांडू मध्यप्रदेश के पर्यटन खजाने में बेशकीमती मोती की तरह चमकता है। सुल्तानों के समय में ‘शादियाबाद’ के नाम से जाना जाता था, जिसका मतलब है ‘खुशियों का शहर’। वास्तव में यह नाम इस जगह को सार्थक करता है। मध्य प्रदेश के हरे-भरे घने जंगल, नर्मदा का सुरम्य तट, यह सब मिलकर मांडू को मालवा का स्वर्ग बनाते हैं।

बाज बहादुर और रानी रूपमती की प्रेम कहानी ने एक अलग ही पहचान दी मांडू को

13वीं शताब्दी में यहां मुस्लिम शासकों का शासन था। बाज बहादुर और रानी रूपमती की प्रेम कहानी ने मांडू को एक अलग ही पहचान दी। यहां जहाज महल, हिंडोला महल, रानी रूपमती महल, शाही हमाम, होशंगशाह का मकबरा के अलावा यहां के विशाल दरवाजे और गुंबद भी देखने लायक हैं। प्राकृतिक वादियां और कुछ मंदिर भी यहां देखे जा सकते हैं। प्राकृतिक नजारों को पसंद करने वालों को यहां की वादियां और ईको पॉइंट बेहद आकर्षित करता है। ईको पॉइंट पर पहाड़ों से टकराकर अपनी ही आवाज सुनने का चस्का पर्यटकों को कम से कम एक बार तो रोकता ही है। वैसे मांडू के आगे बूढ़ी मांडू भी है और यह दोनों ही स्थान ट्रेकिंग के शौकीनों को भी पसंद आते हैं। मांडू की एक और खूबी यहां की इमली है, जो अपने अलग आकार और स्वाद के लिए जानी जाती है। मांडू अपने ही वाहन से ज्यादा बेहतर होगा। यदि कोई यहां नाइट स्टे करना भी चाहता है तो उसकी सुविधा भी यहां है।

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