विधानसभा में संसदीय सचिवों को लेकर विपक्ष का वैधानिकता को लेकर सवाल, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा- न परिचय की जरुरत और न ही चर्चा की, भाजपा सरकार ने भी की थी नियुक्ति ….

रायपुर (गुणनिधि मिश्रा) । विधानसभा में आज शून्यकाल के दौरान विपक्ष ने संसदीय सचिवों की वैधानिक स्थिति पर सवाल खड़ा किया तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा से पूछा कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति आपने भी की थी, तब क्या सदन में उनका परिचय करवाया गया। जब उस समय नहीं हुआ तब अब इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। विधि मंत्री मोहम्मद अकबर ने इस बात को और बढ़ाते हुए कहा कि मंत्रियों से संसदीय सचिवों का परिचय करा दिया गया है। जिनके सहयोग के लिए उन्हें नियुक्त किया गया है। संसदीय सचिव मंत्री का दर्जा प्राप्त नहीं हैं, इसलिए यहां परिचय की आवश्यकता नहीं है।

विधानसभा में मानसून सत्र के दूसरे दिन आज शून्यकाल में संसदीय सचिवों की नियुक्ति का मामला जोर-शोर से उठाया गया। भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने संसदीय सचिवों के बारे में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना था कि रमन सिंह के कार्यकाल में जब संसदीय सचिवों की नियुक्ति की गई तब मोहम्मद अकबर हाईकोर्ट गए थे। आज वे विधि मंत्री हैं। अब सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति क्यों की गई है। यह व्यवस्था का प्रश्न है।

विधि मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का जो निर्देश आया हुआ है। उसका पालन करते हुए संसदीय सचिव बनाए गए हैं। इस पर भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि संसदीय सचिवों के बारे में सदन को जानकारी दी ही नहीं गई है। संसदीय सचिव बनाए गए हैं तो वह संसदीय प्रक्रियाओं में मंत्रियों की मदद करने के लिए बनाए गए हैं। इसके संबंध में सदन को जानकारी दी जानी चाहिए कि उनका क्या काम होगा?

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने भी विषय को उठाते हुए कहा कि कांग्रेस ने ही इसका विरोध किया था। अब कांग्रेस की सरकार ने ही संसदीय सचिव बनाए हैं। सदन में संसदीय सचिवों का परिचय कराना चाहिए था। सदन में इस बात की जानकारी दी जानी चाहिए थी कि संसदीय सचिवों की वैधानिक स्थिति क्या है?

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विपक्ष के इस सवाल पर कहा कि क्या इसके पहले विधानसभा में संसदीय सचिवों का परिचय कराया गया है। संसदीय सचिवों के मामले पर यह फैसला आपकी सरकार के समय आया था। क्या आपने उस फैसले के बारे में अवगत कराया। मैं समझता हूं कि संसदीय सचिव के बारे में और कोई चर्चा की आवश्यकता नहीं है.

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ विधायक धर्मजीत सिंह ने भी कहा कि पूर्ववर्ती रमन सिंह कार्यकाल में संसदीय सचिव बनाए गए। मोहम्मद अकबर कोर्ट में गए थे। संसदीय सचिव के मामले में हाईकोर्ट पर भी भरोसा नहीं था। सुप्रीम कोर्ट गए थे तो कम से कम संसदीय सचिव बनाने के पहले थोड़े इंतजार कर लेते। उन्हें जवाब देने के लिए भी खड़ा कराया जाएगा। अनुदान भी दे दिया जाएगा। इसलिए इस संबंध में स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। उनके अधिकारों से सदन को वाकिफ कराया जाना चाहिए.

विधि मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि संसदीय सचिव मंत्रियों को सहयोग करने के लिए बनाए गए हैं। मंत्रियों से संसदीय सचिवों का परिचय करा दिया गया है। संसदीय सचिव सदन में जवाब नहीं देंगे, इसलिए सदस्यों से उनका परिचय कराने की आवश्यकता नहीं है। संसदीय सचिवों को मंत्री का दर्जा प्राप्त नहीं है, इसलिए उन्हें यहां पर परिचय देने की भी आवश्यकता नहीं है.