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प्रधानमंत्री जी यह समय प्रोटोकॉल का नहीं है …

महामारी के इस भीषणकाल में PROTOCOL का गाल बजाने वाले हमारे प्रधानजी से पूछना चाहिए कि..दिल्ली के CM विगत एक सप्ताह से याचना कर रहे थे.. भीख माँग रहे थे… पूरी गंभीरता को सार्वजनिक रूप से TV में आकर बतला रहे थे… आप बंगाल चुनाव को प्राथमिकता देते हुए वहाँ व्यस्त थे… दिल्ली हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि…”केन्द्र सरकार का रवैया हैरान करने वाला है। इनको आमजनता के जान की कोई चिंता नहीं है। आप आसमान जमीन एक कर दीजिए पर OXYGEN की पूर्ति राज्यों को कीजिए”.. उसके बाद दिल्ली के लिए 105 टन ऑक्सीजन कोटा बढ़ा तो दिया गया पर आपूर्ति के लिए केंद्र उतनी गंभीरता नहीं दिखा रही थी जबकि हॉस्पिटल में कोरोना मरीजों के लिए एक एक मिनट भारी पड़ रहा था।

अगर प्रधानजी 15 दिन पहले ही OXYGEN आपूर्ति पर गम्भीर हो गए होते तो..जो हमारे लोग ऑक्सीजन के कमी के कारण तड़प कर मर गए उनमें से बहुतों को बचाया जा सकता था. इस लापरवाही के PROTOCOL की जवाबदेही पर भी प्रधानजी सहित भाजपा के साथी और गोदी मीडिया कुछ बोलेंगे..?? समय पर ऑक्सीजन राज्यों को उपलब्ध नहीं कराने के कारण कितने लोग मेरे हैं केन्द्र सरकार जवाब देगी.??

जबकि ऑक्सीजन की किल्लत देश के सभी राज्यों  मसलन UP, MP, हरियाणा आदि में भी है और सभी राज्यों में इसकी आपूर्ति में केन्द्र को समय रहते गंभीरता दिखलानी चाहिए थी जिसमें केन्द्र ने घोर लापरवाही बरती है…जबकि हाईकोर्ट सहित SUPRIME COURT ने भी इमरजेंसी जैसी स्थिति की बात कहा..उसके बाद भी केन्द्र इस दिशा में गंभीर हो जाती तो  “एयर लिफ्ट” कर 2 दिन में बल्कि 24 घंटे के अन्दर ऑक्सीजन आपूर्ति कर सकती थी हमारे सेना में , वायु सेना में बहुत क्षमता है.

जब केन्द्र OXIGEN के मुद्दे पर कान में तेल डाल ली थी….भाजपा शासित राज्यों उत्तर प्रदेश और हरियाणा द्वारा ऐसे मानव त्राषदी में भी मानवता को भी शर्मसार करने वाली घटिया हरकत कर OXIGEN TANKER के आपूर्ति में रोड़ा अटकाया जाये तो CM केजरीवाल  द्वारा हकीकत बयां कर इस कड़वी सच्चाई को प्रधानमंत्री को बताते हुए सार्वजनिक कर भी दिया गया तो इतनी हाय तौबा क्यों..??कौन सी संघीय ढांँचे की सुरक्षा संबंधित गोपनीय मुद्दों पर वार्तालाप चल रही थी.??

चलते चलते मैं पूछना चाहता हूँ कि अति व्यक्तिगत और निजी विषय जैसे केदारनाथ जाकर गुफ़ा में एकाकी साधना को भी जब प्रधानजी ” लाइव टेलीकास्ट” करवाते हैं…तब इस जनहित के मुद्दे पर LIVE हो जाने पर इतनी पीड़ा क्यों.??

रही बात PROTOCOL की तो महामारी प्रोटोकॉल का खुद गाल बजाने वाले प्रधानजी जो “”दो गज दूरी मास्क है जरूरी””का पाठ पढ़ाते हैं और बंगाल चुनाव प्रचार में खुद बिना मास्क हजारो की भीड़ लगाकर रैली करें तो PROTOCOL भँग नहीं होता..? देश के गृहमंत्री भी वही काम करें तो प्रोटोकॉल भँग नहीं होता, इस महामारी में भी भाजपा शासित राज्य उत्तराखंड में कुम्भ आयोजित हो जिसमें सैकड़ों कोरोना संक्रमित हो जाते हैं..,महंत की मृत्यु हो जाती है तब PROTOCOL भँग नहीं होता..? केन्द्र सरकार अपना दायित्व ऑक्सीजन पर न निभाये जिसपर हाईकोर्ट को चिंता जतानी पड़े,…केन्द्र सरकार पर तल्ख टिप्पणी करनी पड़े,..लताड़ लगानी पड़े तब PROTOCOL भँग नहीं होता.??

ऐसी मानव त्राषदी के मार्मिक वक्त में केंद्र को अपने पार्टी का हित छोड़कर लाभहानी का बिना ख़्याल किये केवल और केवल..””राजधर्म और मानव धर्म”” का पालन करना चाहिए।

©शिवनाथ केशरवानी             

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