कोरोना मरीज के संपर्क में अफसर-कर्मियों की बढ़ी चिंता, उच्चाधिकारियों को मामले से कराया अवगत लेकिन कहीं नहीं हो रही सुनवाई

कोरबा (गेंदलाल शुक्ल) । नगर पालिक निगम कोरबा के जोन कार्यालय कोरबा में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारी सदमे की स्थिति में है। दरअसल वे सभी कोरोना पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आ चुके हैं और संक्रमण की आशंका से ग्रसित हैं। उन्होंने कलेक्टर से लेकर नगर निगम कमिश्नर और अन्य उच्चाधिकारियों को अपनी आशंका से अवगत करा दिया है लेकिन उनकी बात अब तक अनसुनी की अनसुनी है।

मिली जानकारी के अनुसार कोरबा जोन कार्यालय में पदस्थ कर्मचारियों ने इतवारी बाजार के पास से एक फल दुकानदार से फल की खरीदी की थी। अब पता चला है कि उक्त फल दुकानदार ताजा ताजा बिहार से लौटा था और अपने साथ कोरोना का संक्रमण भी ले आया था। कल हुई जांच में उक्त फल व्यापारी परिवार सहित कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। इस बात की जानकारी निगम के कोरबा जोन कार्यालय में पदस्थ कर्मचारियों को हुई तो उनके बीच हड़कंप मच गया।

आपसी चर्चा के बाद जोन कार्यालय में पदस्थ अधिकारियों कर्मचारियों ने संपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी कलेक्टर नगर निगम आयुक्त और अन्य अधिकारियों को लिखित में दी है लेकिन कर्मचारियों द्वारा दी गई लिखित सूचना पर अब तक प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई गई है। दूसरी ओर नगर निगम जोन कार्यालय में कर्मचारियों में भारी घबराहट और आक्रोश का वातावरण निर्मित हो गया है। ज्ञात हो कि नगर निगम के ये अधिकारी कर्मचारी पिछले तीन माह से कोरोना वारियर्स के रूप में काम करते आ रहे हैं। अब , दूसरों की प्राण रक्षा के लिए समर्पित इन कर्मवीरों की खुद की जान पर बन आई है।

एक और कलेक्टर कोरबा श्रीमती किरण कौशल कोरोना की रोकथाम के लिए लॉकडाउन जैसे कड़े निर्णय ले रही है और उनके अव्यवहारिक निर्णय से शहर के व्यापारियों और आम लोगों में गहरा आक्रोश व्याप्त है वहीं दूसरी ओर नगर निगम के कर्मचारियों की ओर से दी गई सूचना पर त्वरित कार्यवाही नहीं किया जाना अनेक सवालों को खड़ा करता है। आश्चर्य की बात तो यह है की नगर निगम के उच्चाधिकारी भी अपने अधिनस्थ अधिकारियों कर्मचारियों के स्वास्थ्य और प्राणों की कोई चिंता नहीं कर रहे हैं। जिले के आला ओहदेदारों के इस बर्ताव से समझा जा सकता है कि इन अधिकारियों का आम नागरिकों के प्रति संकट की घड़ी में कैसा आचरण हो सकता है।