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दिल्ली दरबार: योगी आदित्यनाथ होंगे कमजोर या बढ़ेगी ताकत …

 

नई दिल्ली (पंकज यादव) । उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर उलटी गिनती शुरू हो गई है। अगले छह से सात महीने के बीच प्रदेश में आचार संहिता लग जाएगी और चुनाव की​ तिथियों का एलान हो जाएगा। इस बीच बड़ी चर्चा प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर है कि आखिर वे कमजोर मुख्यमंत्री साबित होंगे या फिर उनकी ताकत बढ़ेगी।

बीते कुछ दिनों में प्रदेश की सियासत में योगी आदित्यनाथ को लेकर तरह—तरह की चर्चाएं भी चली। इस बीच भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष का प्रदेश के दौरे पर जाना और पार्टी नेताओं और मंत्रियों से अलग—अलग मंत्रणा करना चर्चा के केंद्र में रहा। अब योगी आदित्यनाथ को लेकर फैसला दिल्ली दरबार में होना है। यानि की बीएल संतोष अपनी रिपोर्ट पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, संघ प्रमुख मोहन भागवत के सामने रखेंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रदेश सरकार में कुछ मंत्रियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किए जा सकते हैं वहीं प्रदेश अध्यक्ष को भी बदला जा सकता है। कोरोना महामारी के दौर में उत्तर प्रदेश सरकार की जो किरकिरी हुई है उसको कैसे सकारात्मक बनाया जाए इस पर भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व मंथन कर रहा है।

बड़ा सवाल यह है कि योगी आदित्यनाथ की ताकत बढ़ेगी या कमजोर होगी। इस बात को लेकर भाजपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगर योगी आदित्यनाथ को ज्यादा ताकत दी जाती है तो प्रदेश में भाजपा के​ लिए चुनाव जीतना मुश्किल होगा। क्योंकि प्रदेश के कई नेता अलग—अलग मंचों पर सरकार के प्रति अपना गुस्सा जाहिर कर चुके हैं। नेता के मुताबिक इसलिए बैलेस करके चलने की रणनीति बनानी होगी। आशय साफ है कि योगी आदित्यनाथ की ताकत तो नहीं बढ़ने जा रही है। दिल्ली दरबार में मंथन के बाद ही आगे की तस्वीर साफ हो पाएगी।

 

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