नगर निगम कोरबा में अधिकारियों के नाक के नीचे हो रहा भ्रष्टाचार, हितग्राहियों की लिस्ट लेकर घूम रहे एजेंट, वीडियो हुआ वायरल

कोरबा (गेंदलाल शुक्ल) । नगर पालिक निगम कोरबा के बाँकीमोगरा जोन में प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों से किश्त जारी करने के एवज में रिश्वत लेने का मामला उजागर हुआ है। वर्तमान प्रकरण बाँकीमोगरा जोन के डगनीया खार का है जहां प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही सतपाल सिंह से योजना अंतर्गत मिलने वाली धनराशि की किश्त खाते में ट्रांसफर करने के एवज में रिश्वत की मांग करते हुए एक व्यक्ति का वीडियो सामने आया है। वीडियो में उक्त व्यक्ति खुद को पुस्तकालय संचालक तथा आर.टी.ओ. इंश्योरेंस एजेंट बता रहा है जिसके द्वारा सामान्य तौर पर निगम से संबंधित कार्य जैसे गुमास्ता आदि बनाने का काम भी किया जाता है।

वीडियो में उक्त एजेंट द्वारा नगर निगम साकेत में प्रधानमंत्री आवास योजना का काम देख रहे हैं अधिकारी कर्मचारियों के कहने पर संबंधित हितग्राहियों से संपर्क करने की बात कही जा रही है, जिससे दोनों को लाभ हो सके। वीडियो में तथाकथित एजेंट के द्वारा बाँकीमोगरा जोन में कार्यरत निगम के कर्मचारी महेश्वर का नाम लिया जा रहा है तथा नगर निगम साकेत भवन के एकाउंट सेक्शन/लेखा शाखा में कार्यरत कर्मचारी को टकला व मुंडा कहकर संबोधित किया जा रहा है।

मामले की पड़ताल करने पर उक्त शख्स साकेत भवन के एकाउंट सेक्शन में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप के कार्यरत होना बताया जा रहा है जिसकी सांठ-गांठ बांकीमोगरा जोन में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर बृजेश यादव से होने की बात सामने आई है। प्राप्त जानकारी अनुसार साकेत में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा बृजेश यादव को हितग्राहियों की लिस्ट प्रदान की गई थी और हितग्राहियों से संपर्क कर धनराशि जारी करने के एवज में रिश्वत मांगने का षड्यंत्र रचा गया था। तत्पश्चात बृजेश यादव के द्वारा वीडियो में नज़र आ रहे शख्स को यह जिम्मा सौंपा गया की वो घर-घर जाकर हितग्राहियों से संपर्क करे तथा किश्त की राशि जारी करने के पश्चात उनसे 10,000 से लेकर 25000 तक की रिश्वत वसूले, जिससे दोनों ही दो पैसे कमा सके।

आपको बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा गरीबी रेखा के नीचे के जीवन यापन कर रहे लोगों को पक्का मकान मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत धन राशि प्रदान की जाती है। यह राशि हितग्राहियों को अलग-अलग किश्तों में निर्माण कार्य को ध्यान में रखकर चरणबद्ध तरीके से जारी की जाती है। निर्माणकार्य के निरीक्षण के लिए केंद्र सरकार द्वारा PMC व CLPC कंपनी नियुक्त की गई है जो निर्माण कार्य के विभिन्न चरणों के अनुसार अपनी रिपोर्ट भेजती है जिसपर निगम अधिकारियों के द्वारा अंतिम निरीक्षण पश्चात मुहर लगाने के बाद ही हितग्राहियों के खातों में धन राशि नगर निगम द्वारा ट्रांसफर की जाती है।

उक्त व्यवस्था का फायदा भर्ष्टाचार में संलिप्त दोनों कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा उठाया जा रहा है और हितग्राहियों के आवेदनों को किसी न किसी कारण लंबित रखा जा रहा है जिससे हितग्राही परेशान हो और किश्त जारी करने मुँहमाँगी रिश्वत देने तैयार हो जाए। एक ओर जहाँ रेत की बढ़ी हुई कीमतों और लगातार हो रही बारिश के कारण रेत घाट पर प्रतिबंध लग जाने से खुद का पक्का मकान होने का आमजन का सपना अधर में लटका हुआ है तो दूसरी ओर सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता पर भी गिद्ध की तरह नज़र गड़ाए बैठे सरकारी नुमाइंदों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी है।