
भ्रष्टाचार रोकने के लिए ऑडिट जरूरी, एशियाई विकास बैंक का सुझाव: केवल जरूरतमंदों को मिले सब्सिडी
रिपोर्ट के अनुसार, कोविड के बाद केंद्र सरकार की सब्सिडी 2022-23 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 2.7 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। बाद में यह घटकर 2024-25 (संशोधित अनुमान) में 1.7 प्रतिशत रह गई। वहीं राज्यों का खर्च लगातार बढ़ा है और यह वर्ष 2017-18 में यह उनके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 2.1 प्रतिशत था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 3.0 प्रतिशत हो गया।
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और पीडब्ल्यूसी के संयुक्त अध्ययन में कहा गया है कि सरकार को सभी लोगों को दी जाने वाली सामान्य सार्वभौमिक सब्सिडी से हटकर केवल जरूरतमंद लोगों को सीधे लक्षित लाभ देने की व्यवस्था अपनानी चाहिए। इस रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि लाभ पाने वालों के लिए सख्त पात्रता नियम बनाए जाएं, योजनाओं की समय-सीमा तय की जाए और समय-समय पर इसका ऑडिट किया जाए ताकि भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होने के साथ ही पैसे की बरबादी कम हो और सरकारी खर्च अधिक प्रभावी बने।
यह रिपोर्ट 16वें वित्त आयोग को सौंपी गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्वजनिक खर्च की गुणवत्ता सुधारने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सही लोगों तक लाभ पहुंचाना, पारदर्शिता बढ़ाना और जवाबदेही मजबूत करना बहुत जरूरी है।
अध्ययन में कहा गया है कि भारत की सब्सिडी व्यवस्था में बदलाव लाने की जरूरत है। सभी को एक जैसी सब्सिडी देने की बजाय इसे धीरे-धीरे बंद किया जाए। केंद्र और राज्य सरकारों को आधार से जुड़ी पहचान के जरिये सही लाभार्थियों को चुनना चाहिए। साथ ही, नई योजना शुरू करने से पहले और बाद में उसके प्रभाव का आकलन करना अनिवार्य किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि योजना वास्तव में लाभकारी है या नहीं। अध्ययन में केंद्र सरकार और 21 बड़े राज्यों द्वारा दी जा रही सब्सिडी और नकद हस्तांतरण का विश्लेषण किया गया है। इसमें अनुमान लगाया गया है कि ये सब्सिडी कुल सार्वजनिक खर्च का लगभग 7 से 10 प्रतिशत हिस्सा हैं।














