नई दिल्ली

सड़क हादसों की जल्द जांच के लिए बनेंगे ट्रैफिक पुलिस थाने, शुरू की तैयारी …

नई दिल्ली । स्थानीय की तरह ही ट्रैफिक थानों में भी एसएचओ और उसकी टीम होगी। इन थानों के निर्माण के बाद दिल्ली पुलिस के स्थानीय थानों से काम का बोझ कम होगा, क्योंकि दिल्ली में हर साल पांच हजार से अधिक सड़क दुर्घटना के मामले सामने आते हैं। इसके अलावा ट्रैफिक थाना स्थापित होने से ट्रैफिक से जुड़ी किसी भी समस्या और उसके समाधान के लिए आम लोग भी इधर-उधर भटकने की बजाय सीधे ट्रैफिक थाने पहुंच सकेंगे।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अब यातायात संभालने के साथ ही सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं की भी जांच करेगी। हर जिले में ट्रैफिक पुलिस उपायुक्त नियुक्त होने के बाद अब हर सर्किल में एक थाना बनाने की तैयारी है। आलाधिकारियों से इस पर रायशुमारी के बाद जल्द ही दिल्ली में ट्रैफिक पुलिस के थाने अलग दिखाई देंगे।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि ट्रैफिक थाने बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय से एक प्रस्ताव बनाकर वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा गया था। स्पेशल सीपी रैंक के एक अधिकारी ने इस प्रस्ताव पर विचार के लिए उसे अन्य स्पेशल सीपी और जॉइंट सीपी रैंक के अधिकारियों के सामने रखा था। इस पर रायशुमारी के बाद ज्यादातर अधिकारी ट्रैफिक के अलग थाने बनाने के पक्ष में हैं और उन्होंने मुख्यालय को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। सूत्रों ने बताया कि सब कुछ सही रहा तो जल्द ही प्रस्ताव जमीन पर होगा।

प्रतिवर्ष पांच हजार से अधिक केस : पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस प्रस्ताव में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी ने आंकड़ों के साथ इसके महत्व पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2021 में दिल्ली में फैटल एक्सीडेंट की संख्या 1206 थी, जबकि सामान्य दुर्घटनाओं की संख्या 3480 थी। यानी पिछले वर्ष सड़क हादसों की कुल संख्या 4686 थी। इस वर्ष पहले छह महीने में ही हादसों की संख्या पांच हजार से अधिक पहुंच गई है। अब इन मामलों की जल्द जांच हो सकेगी।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि दिल्ली पुलिस के स्थानीय थानों में भी पुलिसकर्मियों से काम का बोझ कम करने के लिए दो टीमों का गठन किया जा रहा है। इलाके में लॉ एंड ऑर्डर संभालने के लिए स्थानीय थानों में अलग टीम होगी और अपराध के मामलों की जांच के लिए अलग टीम होगी। हर थाने को दो टीमों में बांटने के बाद पुलिसकर्मियों पर से काम का दवाब कम किया जा सकेगा।

अभी थाने में नियुक्त सभी पुलिसकर्मियों को लॉ एंड आर्डर और आपराधिक मामलों की जांच करनी पड़ती है, जिसके चलते उन्हें कोर्ट जाने और पिकेट पर ड्यूटी भी देनी होती है। अगर दो टीम बना दी जाएगी जो पुलिसकर्मियों को एक ही काम करना पड़ेगा। वहीं, अलग ट्रैफिक थाने बन जाने पर सड़क हादसों के केसों की जांच का स्तर और रिस्पॉन्स टाइम में भी सुधार होने की गुंजाइश है।

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