शाला त्यागी बच्चों के लिए उपचारात्मक शिक्षण कार्य में समर्थन देने शिक्षकों को प्रस्ताव
रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत कक्षा पहली एवं दूसरी के बच्चों को स्वयं रूचि लेते हुए अलग से समय देकर नए ढंग से शिक्षा ग्रहण करने के प्रति उपचारात्मक शिक्षा कार्य में समर्थन देने का प्रस्ताव शिक्षकों से किया है।

यह देखा जा रहा है कि कक्ष्रा पहली और दूसरी में पढ़ने वाले बच्चे अक्सर शाला से अनुपस्थित रहते हैं ऐसे बच्चों के प्रति कक्षाओं मे भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता। इसकस परिणाम यह होता है कि ऐस बच्चे प्राय: पिछड़ते जाते हैं और शाला त्यागी हो जाते हैं। अगर प्रारंभ में ही इन बच्चों पर ध्यान दिया जाए तो ये कक्षाओं में नियमित हो सकते हैं।
समग्र शिक्षा द्वारा जारी लिंक, देखें
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स्कूल शिक्षा विभाग का मानना है कि ऐसे बच्चों को अगर एक माह भी अलग से समय देकर शिक्षा के प्रति उनमें रूचि जगाया जाय तो तो ये नियमित कक्षा के लिए तेयार हो जाते हैं। समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्कूल शिक्षा विभाग ने इस तरह उपचारात्मक शिक्षण कार्य में सहयोग देने का प्रस्ताव शिक्षकों के समक्ष रखा है। शिक्षकों से या शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्रों से ऐसे बच्चों की जानकारी देने की अपेक्षा की गई है जो शाला त्यागी हो गए हों अनियमित हों अथवा कक्षानुरूप दक्षता नहीं रखते हों, को अलग से समय देकर पढ़ाना चाहते हैं।

















