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यूपी के गांवों में कोरोना बरपा रहा कहर, अयोध्या के गांवों में सर्वाधिक मौतें, मरीज झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराने मजबूर, घर-घर पसरा मातम …

लखनऊ । कोरोना महामारी इस समय राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में जैसे कहर बरपा रही है। कई गांव तो ऐसे हैं जहां कुछ ही दिनों में कोरोना के इस दूसरे लहर ने कई जानें ले ली हैं। घर-घर मातम पसरा हुआ है। प्रदेश सरकार में तमाम स्तर पर लापरवाहियां भी देखने को मिल रही हैं। कोरोना के लक्षणों से पीड़ित तमाम ग्रामीण छोला छाप डाक्टरों की सेवाएं लेने को मजबूर हैं।

अयोध्या जिले के मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र में तेंधा, धनैचा, उधुई गांव में कोरोना से सर्वाधिक मौतें हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम तथा तहसील प्रशासन की टीम सेनेटाइजेशन करा रही है। बीमार लोगों को दवाएं बांटी जा रही हैं। सीएमओ डा. घनश्याम सिंह ने बताया कि निगरानी टीम घर घर जाकर जुखाम, खांसी व बुखार के साथ सांस फूलने वाले मरीजों की पहचान कर रही हैं।

रायबरेली जिले के गुरबक्श गंज थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर खेड़ा गांव में कोरोना संक्रमण से अब तक करीब 22 लोगों की मौत हो चुकी है। गांव में स्वास्थ विभाग की टीम घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही है। गांव में आने जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

गोंडा के हलधरमऊ ब्लॉक की ग्राम पंचायत हलधरमऊ में करीब 70 प्रतिशत लोग सर्दी, जुकाम व बुखार से पीड़ित हैं। लोग यहां झोलाछाप डाक्टरों से दवा करा रहे हैं। ग्राम प्रधान मसूद खां ने बताया है कि संक्रमण से करीब 16 लोगों की मौत अप्रैल से अब तक हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग इस गांव में चार मौतें बता रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों ने कुछ लोगों की सैंपलिंग की है। दवाओं का वितरण नहीं कराया गया है। एसडीएम करनैलगंज शत्रुघ्न   पाठक दो टूक में कहते हैं कि स्वाभाविक मौत को कोरोना नहीं कहा जा सकता है।

सीतापुर जिले के खैराबाद इलाके में कोरोना संक्रमण से कई लोगों की मौत हो चुकी है। बुखार और सांस लेने की दिक्कत से एक माह के भीतर 40 लोगों के दम तोड़ने की बातें बताी जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक कस्बे में घर-घर टेस्टिंग की प्रक्रिया आरम्भ नहीं हुई है।

श्रावस्ती के सिरसिया विकास खंड क्षेत्र के दुर्गापुर केपी में एक पखवारे में सात लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें से चार लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई थी। अब तक मेडिकल टीम मौके पर नहीं पहुंची है। सीएमओ डा. एपी भार्गव ने बताया कि मरीजों के हिसाब से जिले में संसाधन कम हैं। दुर्गापुर केपी में मेडिकल टीम भेजकर दवा वितरित कराई जाएगी।

बाराबंकी जिले के फतेहपुर ब्लाक (ग्रामीण क्षेत्र) में 628 और मसौली ब्लॉक में 507 एक्टिव केस हैं। मसौली ब्लाक के ग्राम पंचायत देवकलिया और इसके मजरे मुंजापुर में 25 एक्टिव केस मिल चुके हैं। सीएमओ बीकेएस चौहान बताते हैं कि लगातार सैम्पलिंग कराई जा रही है।

बहराइच के गैंसड़ी ब्लाक के कोहरगड्डी गांव में एक सप्ताह में सौ से अधिक कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं। पिछले गुरुवार को इस गांव में 43 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए थे। गांव में निगरानी समितियां एवं स्वास्थ्य टीम काम कर रही हैं। अपर सीएमओ डा. एके सिंघल ने बताया कि टीकाकरण में गांव के लोग सहयोग नहीं कर रहे हैं।

कमोवेश ऐसे ही हालात राज्य के अन्य जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में भी हैं। गांवों का जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। गांवो में संक्रमण और कामधाम ठप होने से तमाम ग्रामीणों के सामने खाने-पीने की दिक्कतें भी हैं। हालांकि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद शासन से लेकर जिले तक के प्रशासनिक अधिकारियों ने गांवों में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए तमाम कदम उठाने शुरू किए हैं। सेनेटाइजेशन, फागिंग का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। लक्षण वाले लोगों की जांच कराई जा रही है। कोरोना संक्रमितों को दवाएं भी देने का काम स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने शुरू कर दिया है।

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