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कोरोना काल में इंदौर के सांसद ने 5 घंटे की नींद ली, परिवार से अलग रहे और बन गए देश में नंबर वन …

छत्तीसगढ़ के सांसद सर्वे सूची से बाहर

 

इंदौर। कोरोना संकट के दौरान बेखौफ होकर जनता के बीच जाने वाले देशभर के 3 सौ सांसदों में इंदौर के सांसद शंकर लालवानी पहले नंबर पर रहे। छत्तीसगढ़ के एक भी सांसद इस सूची में अपना स्थान नहीं बना पाए। स्वच्छता में पहला नंबर हासिल करने वाला इंदौर शहर अब सक्रिय सांसद के मामले में भी नंबर 1 बन गया है।

स्वच्छता में देश में नंबर-वन आने वाले इंदौर शहर के सांसद शंकर लालवानी भी देश में नंबर-वन सांसद बन गए हैं। उन्हें यह खिताब कोरोनाकाल में भी सक्रिय रहने के लिए मिला है। हाल ही में देश के टॉप 50 विधायकों में इंदौर विधायक रमेश मेंदोला का नाम भी आ चुका है।

कोरोना संकट के दौरान बेखौफ होकर जनता तक पहुंचने और हर स्तर पर मोर्चा संभालने में इंदौर के सांसद शंकर लालवानी 300 सांसदों के सर्वे में देश में नंबर वन पर आए हैं। साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर धवल मेहता और उनकी टीम ने यह सर्वे किया है। 12 अंकों के सभी मानकों में वे सबसे अव्वल रहे। करनाल के संजय भाटिया 8 अंकों के साथ दूसरे नंबर और कुरुक्षेत्र के नायब सिंह, पोरबंदर के रमेश धानुक और खजुराहो के सांसद विष्णुदत्त शर्मा के 7-7 अंक के साथ तीसरे नंबर पर रहे। सांसद लीडरशिप के पैमाने पर कितने खरे उतरे, यह पता लगाना मुख्य उद्देश्य था। इस सर्वे में सोशल मीडिया से संबंधित डाटा का उपयोग किया गया।

   यह भी है खास    

  1. -15 मार्च से 20 जून तक ग्राउंड लेवल पर यह सर्वे किया गया।
  2. -मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, बिहार, झारखंड, उत्तर
  3. प्रदेश और महाराष्ट्र के सांसदों को इसमें शामिल किया गया।

 

   सांसद के बारे में   

  1. -इंदौर सांसद के मुताबिक वे कोरोना काल में 5 घंटे की नींद लेते थे।
  2. -सुबह 6 बजे से ही अपने काम पर लग जाते थे।
  3. -व्यस्तता के कारण खाना भी एक ही टाइम खाते थे।
  4. -120 दिन अपने परिवार से अलग कमरे में रह रहे हैं।
  5. -कोविड अस्पताल, ज्यादा मरीजों वाली कॉलोनी, कहीं भी जाने में मैंने परहेज नहीं करते थे।
  6. -कई बार कार में ही थोड़ी देर की नींद ली और कार में सेंव परमल खाकर दिन गुजारा।

 

    यह भी है खास    

 

  1. -15 मार्च से 15 अगस्त तक 488 बैठकें की।
  2. -आपदा प्रबंधन समूह की 122 बैठकें कीं।
  3. -विदेश में फंसे लोगों के लिए 22 फ्लाइट चलवाई।
  4. -रेपिड जांच मशीन की व्यवस्था की।
  5. -अस्पताल को 20 लाख की जांच मशीन दान करवाई
  6. -दिल्ली से विशेष सेम्पल के किट मंगवाए।
  7. -कोरोनाकाल में लगातार जागरूक अभियान चलाया
  8. -सामाजिक संगठनों से शव वाहन की व्यवस्था करवाई।
  9. -सौ से अधिक मित्रों ने निजी वाहन उपलब्ध करवाए।
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