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फिर मुस्कुरायेगा जहान

पतझड़ में फिर आयेगी बहार,
कलियाँ खिलेगी फिर एक बार,
उपवन की फिर बढ़ेगी शान,
फिर मुस्कुरायेगा जहान।

तूफान एक दिन थम जायेगा,
बहारों का मौसम फिर आयेगा,
कोयल फिर गायेगी मधुर गान,
फिर मुस्कुरायेगा जहान।

गम के पल निकल जायेगें,
हर दिल फिर मुस्कुरायेगें,
आयेगी चहरे पर मुस्कान,
फिर मुस्कुरायेगा जहान।

मानेगें नहीं कभी भी हार,
जीत जायेगे फिर एक बार,
मन में लिया फिर ये ठान,
फिर मुस्कुरायेगा जहान।

उमा वैष्णव

परिचय- संस्थापक कलम बोलती है साहित्य समूह, सूरत

सम्मान- मधुशाला परिवार से साहित्य रत्न, स्टार हिंदी बेस्ट राइटर सम्मान तथा स्थानीय व राष्ट्रीय पत्र -पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित

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