इकोनॉमी

क्या पेट्रोल में मिश्रण से कम होगी विदेशी निर्भरता? : एथनॉल का ‘पावर डोज’ फिर भी तेल आयात में तेजी

1 अप्रैल, 2026 से देशभर के पेट्रोल पंपों पर ई20 ईंधन की आपूर्ति शुरू हो जाएगी यानी पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथनॉल मिश्रित होगा और इसे 95 रिसर्च ऑक्टेन नंबर (आरओएन) के रूप में चिह्नित किया जाएगा। इसका मतलब है कि यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर लागू हो जाएगा, लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या इससे हमारे तेल आयात में कमी आ पाएगी?

पश्चिम एशिया युद्ध से उपजे ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के लिए एथनॉल को बेहतरीन वैक​ल्पिक रणनीति बताया है। पिछले कुछ समय से इस दिशा में काफी तेज प्रगति भी हुई है। भारत ने 2026-27 वित्त वर्ष तक 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है और यह काम निर्धारित समय से पांच साल पहले पूरा हो गया है।

एथनॉल मिश्रण 2018-19 में 191.21 करोड़ लीटर से बढ़कर 2024-25 में 1,022.8 करोड़ लीटर हो गया है। इस प्रक्रिया में 2020-21 के बाद तेज वृद्धि हुई है, जिससे तय समय से पहले ही 2026-27 वित्त वर्ष तक 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। जब 2018-19 में एथनॉल मिश्रण 5 प्रतिशत था तब कच्चे तेल का आयात 22.6 करोड़ टन था, जो कुल आवश्यकता का लगभग 87.4 प्रतिशत था। अब 2026-27 वित्त वर्ष तक 20 प्रतिशत मिश्रण तक पहुंचने के बावजूद फरवरी तक ही कच्चे तेल का आयात 22.6 करोड़ टन के स्तर पर है, जिसमें आयात निर्भरता भी 90 प्रतिशत से अधिक हो गई है। इससे पता चलता है कि एथनॉल मिश्रण बढ़ने के बावजूद खपत की तेज दर के कारण आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम नहीं हुई है।

वित्त वर्ष 2025-26 में पेट्रोल की खपत बढ़कर 4 करोड़ टन हो गई, जो 7.53 प्रतिशत की वृद्धि है। वित्त वर्ष 2026-27 में फरवरी तक यह 3.88 करोड़ टन पर है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.3 प्रतिशत बढ़ा है और मांग बढ़ रही है।

 

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