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GST Collection May 2026: मई में GST ने मचाया धमाका! 1.67 लाख करोड़ पहुंचा राजस्व, आयात और उद्योगों ने बदल दी तस्वीर

देश की अर्थव्यवस्था को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। मई महीने में माल एवं सेवा कर (GST) संग्रह ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है। हाई बेस इफेक्ट के दबाव के बावजूद मई में सरकार का GST राजस्व बढ़कर 1.67 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 3.3 फीसदी अधिक है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर किन वजहों से सरकार की कमाई में यह उछाल आया और इसका आम लोगों तथा अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मई में कुल सकल GST संग्रह 1.94 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले साल के मुकाबले 3.2 फीसदी अधिक है। वहीं रिफंड की रकम घटाने के बाद शुद्ध GST संग्रह 1.67 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। आर्थिक विशेषज्ञ इसे देश में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों और मजबूत मांग का संकेत मान रहे हैं।

हाई बेस इफेक्ट के बावजूद दिखी मजबूती

विशेषज्ञों के मुताबिक मई 2025 में एक बड़ी दूरसंचार कंपनी ने स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए करीब 10,000 करोड़ रुपये का एकमुश्त भुगतान किया था। इसकी वजह से पिछले साल का आधार (Base Effect) काफी ऊंचा था। ऐसे में इस साल की वृद्धि दर पर दबाव बनना स्वाभाविक था।

लेकिन अगर इस हाई बेस इफेक्ट को अलग कर दिया जाए तो तस्वीर और ज्यादा मजबूत नजर आती है। आंकड़े बताते हैं कि मई में कुल GST संग्रह में वास्तविक तौर पर करीब 9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि रिफंड के बाद शुद्ध संग्रह में 10.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इससे साफ संकेत मिलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में खपत और उत्पादन दोनों मोर्चों पर मजबूती बनी हुई है।

आयात ने बढ़ाई सरकार की कमाई

मई महीने में GST संग्रह बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा योगदान आयात (Import) का रहा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आयात से जुड़ा सकल GST राजस्व 59,654 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 19.1 फीसदी की तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई।

वहीं शुद्ध सीमा शुल्क GST राजस्व भी 19.7 फीसदी बढ़कर 49,403 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह दर्शाता है कि भारत में उद्योगों के लिए कच्चे माल और जरूरी उत्पादों का आयात तेजी से बढ़ा है।

हालांकि दूसरी तरफ घरेलू GST संग्रह में थोड़ी नरमी देखने को मिली। सकल घरेलू GST राजस्व 2.6 फीसदी घटकर 1.35 लाख करोड़ रुपये रह गया जबकि शुद्ध घरेलू राजस्व 2.3 फीसदी घटकर 1.18 लाख करोड़ रुपये दर्ज हुआ।

CPU और मेमोरी चिप आयात में बड़ा उछाल

सरकारी सूत्रों ने बताया कि इस बार GST संग्रह बढ़ाने में तकनीकी और औद्योगिक उत्पादों ने अहम भूमिका निभाई।

दिलचस्प बात यह है कि CPU (कंप्यूटर प्रोसेसिंग यूनिट) के आयात से GST संग्रह में 387 फीसदी की भारी वृद्धि देखने को मिली। वहीं मेमोरी चिप्स के आयात से टैक्स कलेक्शन 205 फीसदी बढ़ा।

इसका सीधा मतलब है कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और टेक्नोलॉजी सेक्टर में गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।

कोयला और बैटरी सेक्टर ने भी दिखाई ताकत

सिर्फ टेक सेक्टर ही नहीं, ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्र ने भी सरकार की कमाई बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

कोयले के आयात से GST संग्रह में 391 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। इसके अलावा तांबे से जुड़े आयात और लिथियम आयन बैटरी आयात में भी मजबूत बढ़त दर्ज की गई।

यह संकेत देता है कि देश में इलेक्ट्रिक वाहन (EV), नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy), बिजली उपकरण और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहे हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे आयात आधारित उत्पादन क्षमता को मजबूत कर रही है, जिससे आने वाले वर्षों में औद्योगिक उत्पादन और रोजगार दोनों बढ़ सकते हैं।

कर योग्य आपूर्ति में भी बड़ी छलांग

GST नेटवर्क (GSTN) के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में वस्तु क्षेत्र की कर योग्य आपूर्ति (Taxable Supply) में भी बड़ा उछाल देखा गया। यह 26.9 फीसदी बढ़कर 40.1 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई।

कई प्रमुख सेक्टरों में शानदार वृद्धि दर्ज की गई—

  • कंप्यूटर सेक्टर में 48.2 फीसदी बढ़ोतरी
  • विद्युत मशीनरी में 34.1 फीसदी उछाल
  • दूरसंचार उपकरण में 24.6 फीसदी वृद्धि
  • यात्री वाहनों में 21.3 फीसदी बढ़ोतरी

इतना ही नहीं, सोने और कीमती धातुओं की कर योग्य आपूर्ति में भी 46.9 फीसदी का उछाल देखने को मिला।

क्या यह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है?

सरकारी सूत्रों का मानना है कि कर योग्य आपूर्ति में बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था में बढ़ती खपत और मांग का बड़ा संकेत होती है। खास बात यह है कि यह वृद्धि किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है बल्कि कृषि, विनिर्माण, धातु, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता वस्तुओं जैसे कई क्षेत्रों में एक साथ दिखाई दी है।

इससे यह संकेत मिलता है कि देश में घरेलू मांग (Domestic Demand) मजबूत बनी हुई है और उपभोग में वास्तविक वृद्धि देखने को मिल रही है।

सेवा क्षेत्र ने भी बनाए रखा दम

माल उत्पादन के अलावा सेवा क्षेत्र ने भी शानदार प्रदर्शन किया। अप्रैल में सेवा क्षेत्र की कर योग्य आपूर्ति 22.2 फीसदी बढ़कर 11.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

इन क्षेत्रों में खास तेजी देखने को मिली—

  • रियल एस्टेट सेवाएं – 50 फीसदी वृद्धि
  • कानूनी एवं लेखा सेवाएं – 47.2 फीसदी
  • होटल एवं खाद्य सेवाएं – 41.6 फीसदी
  • रखरखाव और मरम्मत सेवाएं – 32.4 फीसदी
  • परिवहन सेवाएं – 21.3 फीसदी वृद्धि

यह संकेत देता है कि कारोबार और उपभोक्ता खर्च दोनों में मजबूती बनी हुई है।

पहले दो महीनों में कितना रहा GST कलेक्शन?

वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती दो महीनों में सरकार का कुल सकल GST संग्रह 4.37 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में GST राजस्व और तेजी पकड़ सकता है।

निष्कर्ष

मई महीने का GST संग्रह यह साफ संकेत देता है कि भारत की अर्थव्यवस्था कई मोर्चों पर मजबूती दिखा रही है। हाई बेस इफेक्ट के बावजूद 1.67 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध GST संग्रह सरकार के लिए सकारात्मक संकेत है। आयात, औद्योगिक गतिविधियों, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और सेवा क्षेत्र में तेजी ने सरकार की कमाई बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो आने वाले महीनों में GST संग्रह नए रिकॉर्ड बना सकता है और इसका सीधा फायदा देश की आर्थिक स्थिति को मिलेगा।

 

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