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कविता क्या है …

कविता ग़रीब की आवाज़ है

मिलन का साज़ है

प्रेम का राग है

बिछोह का अलाप है।

 

कविता कवि की कल्पना है

जीवन की अल्पना है

अंधे की लाठी है

अकेलेपन की साथी है।

 

कविता कवि की प्रेयसी है

विरह की बेबसी है

देश प्रेम का भाव है

जीवन का चाव है।

 

कविता कवि की बेटी है

पोती है, नाती है, नवासी है

ओढ़ना, बिछौना, खिलौना है

कविता कवि के जीवन की प्रस्तावना है!!

 

©शीतल रघुवंशी, अधिवक्ता, दिल्ली उच्च न्यायालय

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