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घोटाले की बू आ रही दिल्ली सरकार की घर-घर राशन योजना पर रोक, उत्तर प्रदेश में यह पूरी तरह ऑनलाइन और कंप्यूटरीकृत

नई दिल्ली/लखनऊ  7 जून

दिल्ली सरकार की ‘घर-घर राशन’ वितरण योजना पर रोक लगाकर केन्द्र सरकार ने एक बड़े घोटाले को रोक लिया। दरअसल दिल्ली में राशन वितरण के लिए आधार कार्ड प्रमाणीकरण की कोई न तो व्यवस्था है और न ही इलेक्ट्रानिक प्वाइंट आफ सेल (ई-पीओएस) कम्प्यूटरीकृत प्रणाली ही लागू है। ऐसे में घर-घर राशन देने की योजना जो अरविंद केजरीवाल सरकार शुरू करने जा रही थी, उस पर संदेह/सवाल यह खड़ा हो रहा था कि वह राशन पात्र व्यक्ति को मिलेगा भी या नहीं ! आरोप तो यह भी है कि दिल्ली सरकार राशन को ‘डायवर्ट’ करना चाह रही थी ! इसके ठीक विपरीत उत्तर प्रदेश जैसे बहुत बड़े राज्य में योगी सरकार ने राशन वितरण प्रणाली को पूरी तरह आनलाइन, कम्प्यूटरीकृत और ई-पीओएस प्रणालीयुक्त कर दिया है। किस पात्र व्यक्ति ने कब और कितना राशन सरकार से प्राप्त किया, इसे कोई भी विभाग की वेबसाइट पर देख सकता है। उसमें शिकायत का भी लिंक है।

उत्तर प्रदेश में कुल राशन कार्ड की संख्या 3.60 करोड़ हैं, जिसके माध्यम से लाभार्थियों की संख्या 14.81 करोड़ है। इन सभी के नाम उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद विभाग (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) की वेबसाइट पर कोई भी देख सकता है। उन्होंने सरकारी राशन की दुकान से कब और कितना राशन उठाया उसे कोई भी देख सकता है। यही नहीं विभाग की वेब साइट पर कुछ महत्वपूर्ण लिंक भी दिए गए हैं। जैसे राशन कार्ड मैनेजमेंट सिस्टम, राशन कार्ड की पात्रता सूची, जिसमें आनलाइन शिकायत करने की भी सुविधा है, सप्लाई चेन प्रबंधन प्रणाली इत्यादि। प्रदेश में सरकारी राशन उचित दर विक्रेताओं की कुल संख्या 79654 है, जहां से पात्र व्यक्ति अपने कोटे का राशन प्रति माह उठाते हैं। कोरोना काल में वहां भीड़ न बढ़े उसको रोकने के लिए टोकन की व्यवस्था की गई है। अकेले वाराणसी जिले में सरकारी राशन की दुकानों पर आने वाले लाभार्थियों को पिछले दिनों 82000 मास्क और 18000 सेनिटाइजर का मुफ्त वितरण किया गया।

दरअसल राज्यों द्वारा जो राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा कानून के तहत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में मुफ्त गेहूँ और चावल का वितरण किया जाता है, उसमें गेहूँ पर दिल्ली सरकार मात्र दो रुपये और केन्द्र सरकार 23.7 रुपये खर्च करती है। इसी तरह चावल पर दिल्ली सरकार 3 रुपये और केन्द्र सरकार 33.79 रुपये खर्च करती है। ऐसे में केजरीवाल सरकार जो ‘घर-घर राशन’ योजना शुरू करने जा रही है, उसमें घोटाले के बू आ रही थी। क्यों कि किसने किसको कितना राशन पहुंचाया, यह कभी भी पता नहीं चलता। सवाल यह है कि दिल्ली सरकार इस पूरी व्यवस्था को कम्प्यूटरीकृत और आनलाइन क्यों नहीं करना चाह रही ?

उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद विभाग (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) की वेबसाइट पर उपलब्ध ताजातरीन आँकड़े बताते हैं कि 7 जून को पूर्वान्ह 9.45 बजे तक 4.17 लाख मी.टन राशन का वितरण किया जा चुका था। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर राशन वितरण प्रणाली को दो पार्ट में बांट दिया गया है। पहले प्रत्येक माह की पांच तारीख से सभी को राशन का वितरण होता था। अब 1 से 12 तारीख तक गरीब, दिहाड़ी मजदूर और अंत्योदय कार्ड होल्डर्स को गेहूँ और चावल का वितरण किया जा रहा है। फिर 13 तारीख से माह के अन्त तक प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 5 किलो चावल का नि:शुल्क वितरण किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश ने बनाया नेशनल रिकार्ड

16 अप्रैल को एक दिन में 72 लाख राशन कार्ड पर अन्न का वितरण किया गया, जो कि प्रदेश में ही नहीं बल्कि यह एक नेशनल रिकार्ड है।

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