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कोलार और नर्मदा का संगम जहां नीलकंठ महादेव विराजमान हैं

मेरी नर्मदा परिक्रमा- 23

होलिकोत्सव 29 मार्च 2021 सोमवार को हम नेमावर से रवाना होकर बीजलगांव, पीपलनेरिया होते हुए लगभग 12:00 बजे नीलकंठ पहुंचे। होली का दिन होने के कारण सड़कों में सन्नाटा पसरा था। रंगोत्सव की कोई विशेष रौनक भी नहीं दिखाई दे रही थी। कोरोनावायरस संक्रमण के प्रकोप के कारण पहले ही लॉकडाउन जैसी स्थिति थी जिसके कारण लोग घरों पर ही थे। इक्का-दुक्का बच्चे ही कहीं धमाचौकड़ी मचाते दिखे। जब हम नीलकंठ पहुंचे तो वहां तिराहे में ग्रामीण फाग गा कर नाच रहे थे। वहां का होलीयाना अंदाज हमें अच्छा लगा। हम नीलकंठ महादेव पहुंच चुके थे।
नीलकंठ सीहोर जिला में नर्मदा एवं कोलार नदी के संगम पर स्थित हैं। यहां नीलकंठ महादेव जी का विशाल प्राचीन मंदिर है जो बिल्कुल संगम तट पर ही स्थित है। नीलकंठ महादेव में गिरी महात्मा का आश्रम है।
नीलकंठ महादेव के प्रांगण से होते हुए हम अत्यंत संकरें ढलान वाले पैदल मार्ग से संगम तक गए। कोलार एवं नर्मदा संगम पर हमने पूजा अर्चना कर चुनरी चढ़ाई। यहां कोलार नदी को माता कौशल्या का रूप माना जाता है इसलिए उसे कौशल्या नदी भी कहते हैं। संगम तट पर दर्शन पूजन करने के पश्चात हम पुनः उसी रास्ते से नीलकंठ महादेव मंदिर में आ गए। महात्मा जी ने हमें पीने के लिए पानी दिया तथा यहां रुकने का भी आग्रह किया।
कुछ देर नीलकंठ महादेव में बैठने के पश्चात हम डिमावर ,बावरी, घाट नेहलाई, रेऊगांव होते हुए आंवली घाट पहुंचे। आंवरी घाट में नर्मदा माता का सौंदर्य अद्भुत है। यहां आंवरी घाट में हमने तट दर्शन एवं पूजन किया। आंवली घाट का संबंध महाभारत काल से है तथा यहां भीम ने तपस्या की है। एक बार उसने नर्मदा के प्रवाह को पत्थरों से रोकने की भी कोशिश की जिसमें उसकी माता कुंती भी साथ दे रही थी परंतु नर्मदा को रोकने का उनका यह प्रयास असफल रहा। आंवली घाट में अनेक मंदिरों के समूह धर्मशालाएं एवं आश्रम है।

आंवरी घाट से रवाना होकर हम दोपहर लगभग 2:30 बजे जिला सीहोर के बुधनी जनपद पंचायत के ग्राम होलीपुरा पहुंचे। होली के दिन होलीपुरा गांव से गुजरना अच्छा लग रहा था पर यहां भी होली का माहौल दिखाई नहीं दिया। सड़क के सूनी थी । लॉकडाउन की स्थिति के कारण होली पर प्रतिबंध जैसा था इसलिए लोगों में कोई उत्साह नहीं दिख रहा था।होलीपुरा गांव के नर्मदा तट से लगभग 5 किलोमीटर दूर है। यहां से दायें मुड़कर हम नर्मदा तट पहुंचे। यहां हमने नर्मदा तट पर सतधारा का दर्शन किया। सतधारा के ऊपर तट पर हनुमान जी के मंदिर सहित अन्य मंदिरों के समूह है। हनुमान जी के मंदिर के सामने मंदिर के संस्थापक महात्मा की विराट समाधि बनी हुई है। यह समाधि इस बात का प्रतीक है कि इस सतधारा नर्मदा तट पर साधु ने तपस्या कर इस धर्म की संस्था को तैयार किया है। हमने हनुमान जी के मंदिर में पूजा अर्चना की। महात्मा जी की समाधि पर सिर नवाया और काफी देर तक यहां हमने विश्राम किया फिर आगे परिक्रमा पर निकल गए।

क्रमशः

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