नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा को लगाई लताड़, ओवैसी बोले- अब इस पर क्या कहेगी भाजपा ….

नई दिल्ली। पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ विवादित टिप्पणी करने को लेकर बीजेपी की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जमकर फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनके कारण देश भर में दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुईं और इसने लोगों को भावनाओं को भड़काया। सुप्रीम कोर्ट की ओर से भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा को लेकर की गई टिप्पणी के बाद विपक्षी पार्टियां बीजेपी पर हमलावर हो गईं हैं। अब इस मामले पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा पर निशाना साधा है। ओवैसी ने कहा, गुजरात की क्लीन चिट पर भाजपा इतनी बात करती है तो फिर आज के फैसले पर वह क्या कहेगी।

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री से मेरी मांग है कि नूपुर शर्मा को गिरफ्तार किया जाए। जब उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है तो फिर उन्हें बचाया क्यों जा रहा है। बीजेपी और मोदी ने इस मसले को प्रतिष्ठा का मुद्दा क्यों बना लिया है। पीएम नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर कब तक चुप रहेंगे। कानून को अपना काम करने दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट के जजों ने आज जो कहा है, उस पर ध्यान देना चाहिए।

ओवैसी ने कहा कि नूपुर शर्मा हैदराबाद में बीजेपी का राष्ट्रीय कार्यकारिणी की मेंबर हैं। वह आज भी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य हैं। आप नूपुर शर्मा को बचा रहे हैं और दूसरी तरफ जुबैर को गिरफ्तार कर रहे हैं। एक महिला को बचा रहे हैं और दूसरी तरफ एक महिला के नाम पर जो घर है, उसे तोड़ देते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शर्मा ने पैगंबर के खिलाफ टिप्पणी या तो सस्ता प्रचार पाने के लिए या किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत या किसी घृणित गतिविधि के तहत की। उसने कहा कि उन्हें पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। न्यूज चैनल पर एक बहस के दौरान पैगंबर के खिलाफ की गई शर्मा की टिप्पणी के विरोध में देशभर में प्रदर्शन हुए थे और कई खाड़ी देशों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। बीजेपी ने बाद में शर्मा को पार्टी से निलंबित कर दिया था।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘ये बयान बहुत व्यथित करने वाले हैं और इनसे अहंकार की बू आती है। इस प्रकार के बयान देने से उनका क्या मतलब है? इन बयानों के कारण देश में दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुईं… ये लोग धार्मिक नहीं हैं। वे अन्य धर्मों का सम्मान नहीं करते। ये टिप्पणियां या तो सस्ता प्रचार पाने के लिए की गईं अथवा किसी राजनीतिक एजेंडे या घृणित गतिविधि के तहत की गईं।’

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