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मराठा आरक्षण और उस पर सरकार की परेशानी …

मुंबई (संदीप सोनवलकर) । महाराष्ट्र की उध्दव ठाकरे सरकार इन दिनों मराठा आरक्षण के सवाल को लेकर बहुत उलझन में है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण के प्रस्ताव खारिज कर दिया है तो दूसरी तरफ सरकार पर दबाव है वह मराठा आरक्षण को लेकर कोई बड़ा कदम उठाएं अन्यथा महाराष्ट्र का मराठा वोट बैंक खिसक सकता है। इस बात को लेकर सरकार के अंदर भी बहुत सारी परेशानियां है एक तरफ जहां एनसीपी को लगता है कि अगर मराठा आरक्षण के सवाल पर सरकार ने कुछ नहीं किया तो फिर सबसे ज्यादा नुकसान उसी को होगा क्योंकि पश्चिम महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मराठा है और एनसीपी का गढ़ भी वही है।

कांग्रेस के मराठा नेता परेशान है उनकी पार्टी को भी राष्ट्रीय स्तर पर इस पर फैसला लेना होगा क्योंकि मराठवाड़ा से आने वाले कांग्रेस के नेता भी परेशान है कि कहीं उनका वोट बैंक ना खिसक जाए लेकिन कांग्रेस में मुश्किल यह है दिल्ली का हाईकमान हो या प्रदेश में बैठे अध्यक्ष नाना पटोले दोनों ही मराठा आरक्षण को लेकर बहुत आगे नहीं बढ़ना चाहते।। उनको लगता है अब तो समय आ गया है ओबीसी पॉलिटिक्स की जाए। नाना पटोले खुद भी कुनबी ओबीसी है। मराठा आरक्षण के लिए बने आयोग ने तो अपनी सिफारिश में कुनबी को ही मराठा बता दिया। कहा कुनबी भी पिछड़े हैं इसलिए मराठा भी पिछड़े वर्ग के है और उनको आरक्षण मिलना चाहिए लेकिन अदालत ने इस बात को नहीं माना और कहा यह साबित करने लायक नहीं है कि मराठा समाज असल में पिछड़ा है।

मराठा आरक्षण पर बने आयोग ने तो यह भी कहा कि मराठा असल में कोई जाति नहीं है वह तो वह लडाके हैं जो कुनबी के तौर पर खेती करते थे और बाद में शिवाजी महाराज के कहने पर लड़ने के लिए तैयार हो गए लेकिन जमीनी असलियत यह है आज भी महाराष्ट्र में असल मराठों के 96 कुल माने जाते हैं जो अपने अलावा किसी कुल से भी व्यवहार नहीं करते या ना ही रोटी बेटी का संबंध रखते हैं। सवाल ये उठता है आखिर ये कैसे साबित होगा कुनबी मराठा है। असल में देखा जाए तो कुनबी का मतलब है कुर्मी।। ये काश्तकार होता है विदर्भ में बड़ी प्रमुखता से छोटे काश्तकार हैं जो खेती करते और विदर्भ में सच में कपास की खेती के कारण छोटे काश्तकारों की हालत खराब है। अब नाना पटोले को लगता है कि उनके अध्यक्ष बनने के बाद विदर्भ का कुनबी समाज उनके साथ खड़ा होगा और अगर मराठाओं को भी कुनबी समाज में गिना जाए ओबीसी कहलाने वाले कुनबी समाज का नुकसान हो सकता है ।

महाराष्ट्र में महाराष्ट्र में करीब 22 फ़ीसदी मराठा है और ओबीसी की संख्या 26 फीसद से ज्यादा है जाहिर है कि कांग्रेस चाहती है कि ओबीसी का साथ उसको मिले क्योंकि मराठा वोट बैंक तो क्षेत्र और नेता के हिसाब से अधिकतर एनसीपी के साथ और कुछ कांग्रेस के साथ आता है। वही अब बीजेपी ने महाराजा शिवाजी के वंशज उदयनराजे भोसले और सोलापुर के मजबूत मराठा परिवार मोहिते पाटील परिवार को साथ में लेकर पश्चिम महाराष्ट्र के मराठों में सेंध लगाना शुरू कर दिया ।मराठा आरक्षण के सवाल पर एनसीपी चाहती है तत्काल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए और उसमें एक प्रस्ताव पास किया जाए।

मोदी सरकार इस विषय पर कानून बनाए जिसे सुप्रीम कोर्ट में साबित किया जा सके। असल में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी जाति को ओबीसी में गिनने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार को है और केंद्र का ओबीसी आयोग आयोग ही तय कर सकता है कि मराठा पिछड़े हैं या नहीं। एक बात तो है कि मराठा सामाजिक तौर पर महाराष्ट्र में उच्च वर्ग में आते हैं और उन पर सामाजिक विषमता का कोई दवाब नहीं लेकिन जब से खेती में नुकसान होना शुरू हुआ तबसे मराठों को लगता है शिक्षा और नौकरी में उनको आरक्षण मिलना चाहिए ताकि वह मराठा जो आर्थिक तौर पर गरीब है उनको सहारा मिल सके लेकिन महाराष्ट्र में करीब 52 फ़ीसदी आरक्षण है। जिसमें से केवल 2 फ़ीसदी ही अति पिछड़ा और गरीब वर्ग के लिए लेकिन मराठा इस पर संतुष्ट नहीं।

बीजेपी सरकार ने अपने कार्यकाल में मराठा आरक्षण का बिल पास किया था जिसमें 16 फ़ीसदी आरक्षण मराठाओं को शिक्षा और नौकरी में दिया गया। मजे की बात की है कि मुंबई हाई कोर्ट ने भी इसे सही करार दे दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। अब सरकार मुश्किल में है इस पर फैसला कैसे लिया जाए। बीजेपी तो पूरी तैयारी में है कि मराठा आरक्षण के सवाल को बहुत ज्यादा उछाल आ जाए ताकि राज्य में मराठा वोट बैंक उसकी तरफ आ सके।

बीजेपी की तैयारी है की कोरोना का कहर कम होते ही वह बड़े मोर्चे निकालेगी और इसकी लीडरशिप बीजेपी के ही राज्यसभा सांसद उदयन राजे भोसले और महाराजा शिवाजी के वंशज शिवेंद्रराजे भोसले के हाथ में रहेगी। इसका सीधा असर देखने मिलेगा अगले साल निकाय चुनाव में लेकिन इसके पहले ही बीजेपी ने हाल ही में पंढरपुर का उपचुनाव जीतकर यह तो दिखा दिया है कि मराठा बहुल इस सीट पर उसकी पकड़ मजबूत हो चली। इस उपचुनाव में जहां एनसीपी के अजित पवार पूरी कमान संभाले हुए थे वही बीजेपी की तरफ से सोलापुर के दिग्गज मराठा परिवार मोहिते पाटील लगातार सक्रिय और जीत बीजेपी की इससे इससे एनसीपी को बड़ा झटका लगा है।

एनसीपी को डर है इसी तरह बीजेपी अगर मराठा वोट बैंक को साधने में कामयाब रही तो उसका बड़ा जनाधार खिसक जाए। वहीं कांग्रेस के नेता एक तरफ एनसीपी की धार से खुश है तो दूसरी तरफ नाना पटोले जैसे नेता चाहते हैं अब फोकस ओबीसी पर हो नाना पटोले का तर्क है कि पीएम मोदी ने ओबीसी राजनीति करके ही देश में बढ़त हासिल की और कांग्रेस हाईकमान भी इस बात से सहमत मगर मुश्किल कांग्रेस के बड़े नेताओं की है। जिनमें बालासाहेब थोरात और अशोक चौहान जैसे नाम शामिल हैं सबको लगता है कि मराठा कमजोर हुए तो उनका जीतना मुश्किल है और राजनीति में भी उनकी पकड़ कम होगी मराठा आरक्षण का इस्तेमाल महाराष्ट्र के लिए अगली चुनौती है कोरोना वायरस से जीतने की तरफ बढ़ रहा है राज्य लेकिन मराठा आरक्षण के सवाल महाराष्ट्र की आघाडी सरकार मैं दरार पैदा कर सकता है।

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