मध्य प्रदेश

कुपोषण मुक्त करने की पहल, मेरी आंगनवाड़ी लाल और पीले सूरजमुखी से मुक्त है

भोपाल
मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले में इन दिनों अलग-अलग लाल, हरे, पीले रंग के सूरजमुखी के फूल दिखाई दे रहे हैं। आप सोच रहे होंगे कि यहाँ सूरजमुखी फूल की कोई हाइब्रीड वेराइटी  की बात हो रही है। पर यहां बात बिल्कुल अलग है। दरअसल डिंडोरी जिले को कुपोषण से मुक्त करने की एक नई पहल शुरू की गई है।

सूरज की तरफ मुँह कर हमेशा ऊर्जा और सकारात्मकता का संदेश देता सूरजमुखी का फूल जिले की आंगनवाड़ियों, वहाँ के घरों की दीवारों पर अलग-अलग रंगों में दिखाई देती है। यह आम लोगों के कौतुहल का विषय बना हुआ है। साथ ही लोगों को अपने घर पर हरे रंग के सूरजमुखी की चाह भी बढ़ गई है। यही नहीं आंगनवाड़ी केन्द्रों पर भी कार्यकर्ता के बीच होड़ लगी है कि उनके आंगनवाड़ी केन्द्र में "मेरी आंगनवाड़ी लाल एवं पीले सूरजमुखी से मुक्त है" लिखा जाए। आंगनवाड़ी केन्द्र की इस पहल से परिचित होने और इन फूलों का मतलब जानने की जिज्ञासा भी आमजन में पनपी है।

आइए समझते हैं इस पहल को। तीन रंगों के सूरजमुखी के फूल जिसमें लाल रंग अति कुपोषित बच्चा, पीला रंग मध्यम कुपोषित तथा हरे सूरजमुखी से तात्पर्य है कि आंगनवाड़ी केन्द्र में दर्ज बच्चों में से कोई भी बच्चा कुपोषित नहीं है या यह कहें कि दर्ज सभी बच्चे स्वस्थ एवं सुरक्षित हैं। कुपो‍षण मुक्त शब्द देखते ही आंगनवाड़ी में जाकर आमजन पोषण और कुपोषण के बारे में जानकारी ले रहे हैं। नई पहल गाँव, कस्बे के लोगों को आंगनवाड़ी केन्द्र की ओर आकर्षित कर रही है, जो लोग आंगनवाड़ी केन्द्र जाने से कतराते थे, आज उत्सुकतावश केन्द्र आकर जानकारी ले रहे हैं।

डिंडोरी में यह नवाचार रेवा प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य अति गंभीर कुपोषित तथा मध्यम कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन तथा चिन्हित बच्चों का ग्रेड परिवर्तन करते हुए सामान्य जीवन स्तर में लाना है। इसके अतिरिक्त किशोरी बालिकाओं को उनके हार्मोनल विकास के अनुकूल वातावरण प्रदान कर आत्मविश्वास, उत्साह में वृद्धि करना है। साथ ही गर्भवती महिलाओं को पोषण, स्वास्थ्य एवं टीकाकरण के लिए जागरूक करना है, जिससे जन्म लेने वाला बच्चा स्वस्थ हो। इसके अतिरिक्त धात्री माताओं को बच्चों एवं स्वयं के पोषण तथा स्वास्थ्य व स्तनपान के लिए प्रेरित करना है। इस अभियान में रेवा प्रोजेक्ट संचालकों द्वारा स्वास्थ्य कैंप, अधिकारियों द्वारा कुपोषित बच्चों के घर भेंट, सेम बच्चों का चिन्हांकन, आंगनवाड़ी केन्द्रों में नव-दंपत्ति मिलन सम्मेलन, सास-बहू सम्मेलन, एनीमिया केम्प, सिकलसेल कैम्प, नशामुक्ति आदि गतिविधियाँ आयोजित की जाती है।

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