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आपदा की यह कैसी तैयारी? सिर पर मानसून लेकिन नदियों में तटबंध का इंतजार, नदियों का पानी बरपाता है कहर ….

देहरादून। मानसून सिर पर है। बरसात शुरू होने पर नदियों के साथ ही बरसाती नाले भी पूरे उफान पर होंगे। देहरादून नगर निगम क्षेत्र में बड़े क्षेत्रों में नदी किनारे पुश्तों का काम नहीं हुआ है। कांवली रोड बिंदाल क्षेत्र, गांधीग्राम सत्तोवाली घाटी, न्यू बस्ती पटेलनगर, चक्खु मौहल्ला, गोविंदगढ़ टीचर कालोनी, रिस्पना पुल, बिंदाल पुल से सटे इलाके, अधाईवाला में भगत सिंह कालोनी समेत आसपास के इलाके, दीपनगर क्षेत्र आदि ऐसे इलाके हैं जहां बरसात के दिनों में नुकसान होता है। पछुवादून क्षेत्र में यमुना, आसन, शीतला नदी के किनारे और सुद्धोवाला क्षेत्र में टौंस नदी किनारे करोड़ों रुपये के बाढ़ सुरक्षा के कार्य होने हैं।

कहीं अभी मामला प्रस्ताव से आगे ही नहीं बढ़ा है। ऐसे में बरसात में होने वाले नुकसान से कैसे बचाए जाए, इसके लिए भी महकमों की कोई तैयार नजर नहीं आ रही है। महकमों के स्तर पर बरती जा रही लापरवाही की ये स्थिति तब है, जबकि हर साल नदियों के तेज बहाव से बड़े पैमाने पर नुकसान होता है। इसके बाद भी अभी तक इन नदियों के किनारे बसी आबादी, खेती बचाने के लिए तटबंध मजबूत करने का काम पूरा नहीं हुआ है। कई स्थानों पर तो काम शुरू ही नहीं हुआ है।

इन कार्यों के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे गए हैं। अभी तक किसी भी योजना को स्वीकृति नहीं मिल पाई है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता रघुवीर सिंह गुसाईं का कहना है कि चारों नदियों पर बाढ़ सुरक्षा के कार्यों के प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिल पाई है।

चमोली जिले में पिंडर नदी किनारे थराली, नारायणबगड़ समेत अन्य कस्बे और बाजार खतरनाक स्थिति में हैं। ये तटबंध 2013 की आपदा में ध्वस्त हुए थे। इन पर अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है। थराली के पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुशील रावत ने कहा कि सीएम घोषणा के बाबजूद भी तटबंध बनाने का काम शुरू नहीं हुआ है। गोविन्दघाट में भी यही स्थिति है। नदी पर सुरक्षा दीवार निर्माण कार्य जल्द शुरू होने चाहिए।

नरेंद्रनगर सिंचाई डिवीजन के तहत 13 स्थानों को बाढ़ नियंत्रण कार्यों के लिए चिन्हित किया गया है। टिहरी डिवीजन के तहत 16 स्थान चिन्हित हुए हैं। इसके लिए बजट मांगा गया है, जो अभी तक नहीं मिला है। थत्यूड़, कैंपटी, कीर्तिनगर, मुनिकीरेती, मरोड़, खाड़ी और गुलर में तटबंध बनाए जाने हैं। आपदा प्रबंधन अधिकारी बृजेश भट्ट ने बताया कि मानसून को देखते हुए बाढ़ नियंत्रण वाले स्थान चयनित कर बजट के लिए प्रस्ताव दिए गए हैं।

श्रीनगर में 2013 की आपदा के बाद श्रीयंत्र टापू पंचपीपल से श्रीकोट तक सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य प्रस्तावित था। अभी तक पंचपीपल से केदार मोहल्ला तक करीब डेढ़ किमी क्षेत्र तक ही सुरक्षा दीवार का निर्माण काम पूरा हुअ है। केदार मोहल्ला से श्रीकोट तक करीब ढाई किमी सुरक्षा दीवार निर्माण कार्य के लिए बजट स्वीकृत नहीं हो पाया है। सिचाई विभाग के सहायक अभियंता सूर्यप्रकाश ने बताया कि बजट के अभाव में काम रुका हुआ है।

कोटद्वार की खोह, सुखरो और मालन नदी में तटबंध बनाए जाने थे। ये काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। नदी किनारे रहने वाले उमेश, नवीन भारद्वाज, किशन सिंह रावत का कहना है कई गांव खतरे की जद में हैं। कोई सुनने को तैयार नहीं है। सिंचाई विभाग के ईई अजय जॉन का कहना है कि कोटद्वार क्षेत्र में तटबंध निर्माण को 15 करोड़ के प्रस्ताव भेजे गए हैं। अभी ये स्वीकृत नहीं हुए हैं।

द्वाली में तटबंध बन गया है। बिलौना में टेंडर हो गए हैं। थकलाड़, गैनाड़ और भुड़कन्या के लिए बजट नहीं मिला है। बिलौना के सभासद विक्की सुयाल ने बताया कि महर्षि स्कूल के पास से नदी का बहाव आबादी की ओर आ रहा है। यहां तटबंध की सख्त जरूरत है। टेंडर के बाद भी काम शुरू नहीं हुआ है। ईई योगेश तिवारी ने बताया कि थकलाड़, गैनाड़, भुड़कन्या के इस्टीमेट शासन को भेज दिए गए हैं। वित्तीय स्वीकृति नहीं मिली है। बिलौना में काम बारिश के बाद शुरू होगा।

हरिद्वार में लालढांग क्षेत्र के कांगड़ी, श्यामपुर, दुधाला दयालवाला गांव, रसूलपुर मीठी बेरी और चिड़ियापुर में सहायक नदियां से हर साल कटाव होता है। पथरी क्षेत्र के गांव बिशनपुर कुण्डी में बना तटबंध खनन माफियाओं ने कई स्थानों से क्षतिग्रस्त कर दिया है। इससे गांव पर खतरा मंडरा रहा है। अभी तक काम शुरू नहीं हो पाए हैं। एसडीएम पूरण सिंह राणा ने बताया कि तटबंध की जांच कर जल्द मरम्मत कार्य शुरू होगा।

गौरीकुंड, सोनप्रयाग, चन्द्रापुरी, विजयनगर, अगस्त्यमुनि, सुमाड़ी और रुद्रप्रयाग में नदी किनारे खतरनाक है। हालांकि गौरीकुंड, सोनप्रयाग और विजयनगर में सुरक्षा को तटबंध बने हैं। चन्द्रापुरी, सुमाड़ी और रुद्रप्रयाग में नदी किनारे तटबंध नहीं बने हैं। बाढ़ सुरक्षा को अभी तक ठोस इंतजाम नहीं हुए हैं। केदारनाथ में काम जारी हैं। ईई पीएस बिष्ट ने बताया कि रुद्रप्रयाग में जहां बरसात के दौरान नदी के पानी का खतरा है।

 

सभी डिवीजनों को जल्द से जल्द काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। योजनाओं के प्रस्ताव जल्द पास किए जाएं। बजट भी जल्द जारी किया जाए। हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। मानसून से निपटने को सभी तरह की तैयारियां पूरी हैं।

सतपाल महाराज, सिंचाई मंत्री

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