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कोरोना मरीजों को अस्पताल में नहीं मिल रहा बेड, घर में हो रही मौतें, सरकारी आंकड़ों में भी नहीं हो रही गिनती …

नई दिल्ली (पंकज यादव) । भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने हाहाकार मचा रखा है। देश के कई राज्यों में कोरोना से भयावह तस्वीर बन गई है। लोगों को अस्पतालों में जगह नहीं मिल रही है, श्मशानों के बाहर लंबी लाइनें हैं। लोगों को अपनों का अंतिम संस्कार करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा रहा है।

हर रोज सरकारी आंकड़े जारी होते हैं जिनमें देश और अलग-अलग राज्यों में कोरोना से संक्रमित और मरने वालों का ब्यौरा दिया जाता है लेकिन क्या इन आंकड़ों दी जाने वाली जानकारी पूरी होती है? कर्नाटक में शायद ऐसा नहीं है। कोविड प्रबंधन पर सरकार को सुझाव देने के लिए गठित तकनीकी सलाहकार समिति के डॉ गिरिधर राव ने कहते हैं कि कोविड -19 महामारी के बीच कर्नाटक सरकार से सही मौत का डेटा प्राप्त करना मुश्किल है क्योंकि अस्पताल के बिस्तर, ऑक्सीजन की अनुपलब्धता के कारण कई लोग घर पर मर रहे हैं और इनमें से कई कोविड के लिए भी परीक्षण नहीं करवा पा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि “घरों में मरने वाले कोरोना मरीजों को राज्य द्वारा प्रबंधित डेटाबेस में एक कोविड रोगी के रूप में जगह नहीं मिलती है। स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन और सरकारी आंकड़ों में दिखाई गई मौतों को देखते हुए, ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने ‘अस्पताल में बिस्तर’ और समय पर ‘आपातकाल के समय एम्बुलेंस सेवा’ नहीं मिलने के कारण अपनी जान गंवा दी।

समय पर इलाज न मिलने पर कोविड-19 पॉजिटिव मरीजों समेत 500 से अधिक मरीजों की उनके स्थान पर ही मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, केवल एक महीने में कर्नाटक में 595 से अधिक मौतें हुई हैं। बिस्तरों की अनुपलब्धता और/या समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने के कारण कई COVID-19 रोगियों की घर पर ही मृत्यु हो गई।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार मौतों की संख्या को देखते हुए होम आइसोलेटेड मरीजों की मौत के आंकड़े चिंताजनक हैं। उन्होंने बताया कि रोगी की ऑक्सीजन की खराब निगरानी, ​​अस्पताल पहुंचने में देरी, अस्पताल पहुंचने से पहले स्वास्थ्य की स्थिति में अचानक बदलाव आदि कई कारण हो सकते हैं।

डॉ गिरिधर राव ने बताया, “अस्पताल में बिस्तर मिलने से पहले कुछ मरीजों की मौत हो गई। हालांकि, इस समय पर्याप्त संख्या में एम्बुलेंस उपलब्ध हैं, लेकिन बेड की कमी के कारण मरीजों को भर्ती नहीं किया जा सकता है। इस दूसरे चरण में, चिंता की मुख्य बात यह है कि कोविड-19 के कई रोगियों को कोविड आइसोलेशन के दौरान घर पर अपनी जान गंवानी पड़ रही है, जिसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। हमें उचित निगरानी की जरूरत है, समय पर उपचार, ऑक्सीजन की सप्लाई, मरीजों को अस्पताल में स्थानांतरित करना, उनके लिए उचित दवा – तभी कोरोना मरीजों में होने वाली मौतों को टाला जा सकता है।”

डॉ मजीद जो एक पल्मोनोलॉजिस्ट और फेफड़े के विशेषज्ञ हैं,उन्होंने बताया, “केवल सामूहिक टीकाकरण ही उन लोगों को बचा सकता है जो होम आइसोलेशन में मर रहे हैं। इसके पीछे एक कारण है। जब मरीज अस्पतालों की तलाश में इधर-उधर घूमते हैं तो संक्रमण का स्तर बढ़ जाता है। मैं, खुद, होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों के लिए बेड और ऑक्सीजन की सप्लाई खोजने की बहुत कोशिश की। यह भयावह है कि कई लोगों ने होम आइसोलेशन में दम तोड़ दिया है।”

बेंगरुलु में कोरोना वॉरियर के रूप में काम करे रहे जावेद अब्बास ने कहा, “हमें केवल तब पता चलता है जब लोग अस्पताल में मरते हैं और स्वास्थ्य बुलेटिन में डेटा आता है। लेकिन कई मरीज ऐसे भी हैं जो बिना बिस्तर, ऑक्सीजन और इलाज के होम आइसोलेशन में मर रहे हैं। मैंने खुद इसे देखा है।”

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