अर्थव्यवस्था

दोनों देशों ने 2032 तक 200 अरब डॉलर व्यापार का रखा लक्ष्य: भारत-यूएई रिश्तों में नई छलांग

भारत के सस्टेनेबल हार्नेसिंग ऐंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति) कानून के संदर्भ में, दोनों पक्षों ने उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों में साझेदारी की संभावनाओं का पता लगाने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें बड़े परमाणु रिएक्टरों और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (एसएमआर) का विकास और तैनाती, साथ ही उन्नत रिएक्टर प्रणालियों, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संचालन और रखरखाव तथा परमाणु सुरक्षा में सहयोग शामिल है। दोनों नेताओं ने अपनी टीमों को राष्ट्रीय भुगतान प्लेटफॉर्मों को आपस में जोड़ने की दिशा में काम करने का निर्देश भी दिया, ताकि सीमा-पार भुगतान कुशल, तेज और लागत-प्रभावी हो सकें।

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने सोमवार को कई समझौतों की घोषणाएं कीं। इनमें 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 200 अरब डॉलर से अधिक करने का लक्ष्य, बड़े परमाणु रिएक्टरों और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के विकास और तैनाती में सहयोग, तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यूएई के सॉवरिन वेल्थ फंड्स की 2026 में शुरू होने वाले दूसरे इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड में भागीदारी पर विचार करने के लिए आमंत्रण शामिल है।

समझौतों की घोषणा सोमवार शाम को यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान की यात्रा के समापन पर की गई। यूएई के राष्ट्रपति की यात्रा को सरकार के सूत्रों ने शनिवार को अनौपचारिक रूप से और रविवार शाम को औपचारिक रूप से घोषित किया था। यह यात्रा मुश्किल से तीन घंटे से थोड़ी अधिक चली। भारत ने इसे ‘संक्षिप्त लेकिन अत्यंत सारगर्भित यात्रा’ बताया। नहयान शाम चार बजे दिल्ली पहुंचे जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया। भारत ने इसे एक खास भाव बताया जो दोनों नेताओं के बीच की गर्मजोशी और निकट संबंधों को दर्शाता है।

दोनों नेता हवाई अड्डे से प्रधानमंत्री आवास तक एक साथ गए जहां दोनों के बीच बातचीत हुई और कई दस्तावेजों का आदान प्रदान हुआ। प्रधानमंत्री और यूएई के राष्ट्रपति ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के प्रस्तावित गाजा शांति बोर्ड के बारे में भी चर्चा की। ट्रंप ने उसके लिए मोदी को भी संस्थापक सदस्य के रूप में आमंत्रित किया है।

दोनों पक्षों द्वारा की गई दर्जन भर घोषणाओं में प्रमुख थीं: हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी गैस (एडनॉक गैस) के बीच 0.5 एमएमपीटीए (मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष) तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की खरीद के लिए दीर्घकालिक समझौता, जो 2028 से शुरू होकर 10 वर्षों तक चलेगा। इसके अलावा, गुजरात के गिफ्ट सिटी में यूएई की कंपनियों फर्स्ट अबू धाबी बैंक और डीपी वर्ल्ड के कार्यालय और संचालन की स्थापना आदि। फर्स्ट अबू धाबी बैंक गिफ्ट सिटी में एक शाखा खोलेगा, जो व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देगा, जबकि डीपी वर्ल्ड गिफ्ट सिटी से अपने संचालन करेगा, जिसमें अपनी वैश्विक गतिविधियों के लिए जहाजों को लीज पर लेना भी शामिल होगा।

दोनों पक्षों ने गुजरात सरकार और यूएई के निवेश मंत्रालय के बीच गुजरात में धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र के विकास हेतु निवेश सहयोग पर एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी में प्रमुख रणनीतिक अधोसंरचना का विकास शामिल होगा, जैसे एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पायलट ट्रेनिंग स्कूल, मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (एमआरओ) सुविधा, एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, एक छोटा शहरी टाउनशिप, रेलवे कनेक्टिविटी और ऊर्जा अधोसंरचना।

इसके अलावा, अंतरिक्ष, रक्षा, खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने के लिए समझौते किए गए। यूएई की जी-42 कंपनी भारत में एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने में मदद करेगी। दोनों पक्ष डिजिटल डेटा एम्बेसी स्थापित करने की संभावनाओं का पता लगाएंगे और अबू धाबी में ‘हाउस ऑफ इंडिया’ की स्थापना करेंगे। द्विपक्षीय व्यापार को 2032 तक 200 अरब डॉलर से अधिक दोगुना करने की घोषणा में ध्यान सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को दोनों पक्षों में जोड़ने और भारत मार्ट, वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर तथा भारत-अफ्रीका सेतु जैसी पहलों के माध्यम से नए बाजारों को बढ़ावा देने पर होगा।

गत 10 सालों में यह अल नहयान की पहली और बतौर राष्ट्रपति भारत की तीसरी भारत यात्रा थी। शाम को मीडिया को संबोधित करते हुए विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने उनके साथ आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का भी जिक्र किया।

दोनों देशों ने 2022 में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सेपा) पर हस्ताक्षर किए और द्विपक्षीय व्यापार की तेज वृद्धि पर ध्यान दिया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। संयुक्त बयान में कहा गया, ‘दोनों पक्षों के कारोबारी समुदायों के उत्साह से प्रेरित होकर उन्होंने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का निर्णय लिया।‘

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