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जोगी कांग्रेस ने कहा- सिरगेल गोलीकांड की उच्च स्तरीय जांच हो, आदिवासियों के साथ हुआ अन्याय, भाजपा व कांग्रेस का जांच दल बैरंग लौटा …

रायपुर/जगदलपुर (गुणनिधि मिश्रा) । बस्तर के सुकमा जिले के अंतर्गत सिलगेर में गोलीकांड में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) का जांच दल जिसमें प्रमुख रूप से बस्तर कोर कमेटी के अध्यक्ष टंकेश्वर भारद्वाज, संभागीय संयुक्त महासचिव नरेन्द्र भवानी, अजीत जोगी युवा मोर्चा के संभागीय अध्यक्ष संतोष सिंह दंतेवाड़ा जिला अध्यक्ष सुजीत कर्मा एवं ग्राम पंचायत पदेड़ा सरपंच गुड्डु सिरगेल पहुंचकर गोलीकांड की निष्पक्ष जांच कर पार्टी के प्रदेशाअध्यक्ष अमित जोगी को 5 बिन्दुओं में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया जबकि भाजपा और कांग्रेस का जांच दल पुलिस के द्वारा रोके जाने की बहाना बाजी करते हुए बैरंग लौटी।

जांच दल ने बताया सीरगेल में ग्रामीणों द्वारा कैंप हटाने एवं अपने अधिकार के तहत आंदोलन कर रहे ग्रामीणों पर गोली मारकर निर्दोष ग्रामीणों की हत्या की गई है –

(1)    यह कि, 11 मई 2021 रात्रि लगभग 3 बजे ग्राम पंचायत सिलगेर में तीन परिवारों का लगभग 25-30 एकड़ जमीन पर जबरन फोर्स ने रातो रात कब्जा कर लिया, वहीं जब दूसरे दिन 12 मई को लगभग 25-30 ग्रामीण कब्जा किये गए स्थल में पहुंचे और पूछे की गांव की पट्टे का जमीन पे कब्जा क्यूँ किया जा रहा हैं ? पुछे जाने पर उन के साथ मारपीट करते हुए। जहां सुरक्षा बलों द्वारा जबरन ताबड़तोड़ लाठी चार्ज कर गंभीर चोटें पहुंचाए यह सभी ग्रामीण थे जिले पुलिस के द्वारा नक्सली बताया जा रहा है। वास्तव में ये अगर नक्सली होते है तो सुरक्षा बलों के पास अपनी हक की बात करने नहीं जाते।

(2)    यह कि, 13 मई 2021 को दोबारा ग्रामीणों द्वारा इस घटना का विरोध करते हुए लगभग 1 हजार से अधिक की संख्या में सिरगेल गांव कैंप से दूर इकट्ठे हुए और लाठीचार्ज एवं कब्जा किए पट्टे की जमीन के मामले में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जा रहा था लेकिन सुरक्षा बलों के द्वारा पुनः जबरन ग्रामीणों के ऊपर गंभीर चोट पहुंचाने के उद्देशय से लाठी चार्ज किया गया एवं आंसू गैस तक का भी इस्तेमाल किया गया। इस प्रकार शांति पूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपने हक की आवाज उठाने वाले हमारे ग्रामीण आदिवासी भाई- बहनों के उपर सिरगेल में अत्याचार किया जा रहा हैं फिर भी स्थानीय कांग्रेस के विधायक मौन हैं जबकि राज्य में कांग्रेस की सरकार है और इस सरकार के द्वारा निर्दोष आदिवासियों को सुरक्षा बलों के हाथों मरने छोड़ दिया गया है। जिसके लिए कांग्रेस की सरकार जिम्मेदार है।

(3)   यह कि, 14 मई 2021 को फिर से यह आंदोलन बड़ा रूप लिया और आंदोलन करने धरना में बैठे और दोबारा सुरक्षा बलों द्वारा गंभीर रूप से मारपीट किया गया कई सैकड़ो लोग घायल हुए जबकि कई लोग अपने गांव के घरो में अपन इलाज कर रहे हैं।

(4)    यह कि, 17 मई 2021 को पुनः लगभग 5-7 हजार की संख्या में ग्रामीण आदिवासियों ने शांति पूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करते हुए कैंप के पास मोर्चा खोल दिया। इसका मुख्य कारण बिना वजह सुरक्षा बलों के द्वारा आदिवासियों की जमीन को भी कब्जा कर लिया और उल्टा उन पर 12 मई से 17 मई तक लाठी चार्ज किया गया और गंभीर चोटे पहुचाई गई थी। जिससे आदिवासी भड़क गए और इतनी बड़ी संख्या में एकत्रित होकर संवैधानिक तरीके से आंदोलन कर रहे थे लेकिन सुरक्षा बलों के द्वारा उनकी सुनवाई न करते हुए उन पर ताबड़तोड़ पहले हवाई फायरिंग हुई और फिर नीचे खड़े सुरक्षा बल द्वारा सीधे गोली दाग दी गई। जिस कारण घटना स्थल में ही 3 ग्रामीणों की मृत्यु हो गई और वहां भगदड़ मच गया और भीड़ में शामिल एक गर्भवती महिला भी उपस्थित थी उसे भी भीड़ के भगदड़ का शिकार होना पड़ा चोटिल होकर वह अपना इलाज घर पर ही कर रही थी जिसका निधन विगत 25 मई 2021 को हो गई।

(5)    यह कि, 17 मई 2021 की घटना के बाद भगदड़ में लगभग 6 लोग लापता थे बाद में पता चला कि पुलिस के द्वारा उन्हें जेल भेज दिया गया था। जिन्हें लगभग 7 दिन जेल में रहने के बाद एस.डी.एम. कोर्ट के द्वारा जमानत पर छोड़ा गया।

जांच दल ने बताया बस्तर के सिरगेल में निर्दोष ग्रामीण आदिवासियों को गोली कांड का शिकार होना पड़ा जिसमें 3 ग्रामीणों की मृत्यु हुई और 1 गर्भवती महिला के भगदड़ के कारण मौत हुई वहीं 6 लोगों को झूठा मामला में जेल भेज दिया गया। जिसकी जितनी भी निंदा की जाए। वही दुसरी तरफ इस गंभीर मामले में राज्य सरकार के बस्तर आई का शर्मनाक बयान की सभी ग्रामीण नक्सली हैं, और मारे गये ग्रामीण भी नक्सली हैं सरासर झूठा बनावटी और मनगढ़ंत है सरकार चाहे भाजपा की हो या कांग्रेस की हो बस्तर में हमेंशा आदिवासियों की जान जाते रही है।

जांच दल ने उक्त घटना की उच्चस्तरीय जांच करते करने की मांग करते हुए कहा बस्तर के अंदुरुनी इलाके के आदिवासी भाई बहनों को नक्सली बताकर गुलामी जीवन जीने मजबूर किया जा रहा है और बस्तर में आदिवासियों के जल जंगल और जमीन को लूटा जा रहा है।

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