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सिंदूर की रंगत बनेगी गौठान ग्रामों में आय का जरिया, जिला प्रशासन के सहयोग से कृषि विज्ञान केन्द्र का अभिनव प्रयास …

रायपुर (गुणनिधि मिश्रा) । कलेक्टर कोरिया एस. एन. राठौर के निर्देशानुसार कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा परंपरागत कृषि से भिन्न आदिवासी कृषकों को उच्च तकनीकों के साथ नई-नई फसलें लेने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी दिशा में वर्तमान में प्रायोगिक तौर पर कृषि विज्ञान केन्द्र के मार्गदर्शन में आदिवासी कृषकों के समूह द्वारा 5 क्विंटल सिन्दुर के पाउडर का प्रसंस्करण किया गया है। सिन्दुर की 250 ग्राम की पैकिंग की गई है, जिसे बाजार में 38.50 रु. की दर से बेचा जा रहा है।

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वर्तमान में 500 पैकेट सिन्दुर मांग के अनुसार ट्राइफेड, खादीग्रामोद्योग, हस्तशिल्प विकास बोर्ड, फ्लिपकार्ट के आनलाईन प्लेटफार्म माध्यम से एवं स्थानीय स्तर पर बेचा जा रहा है। कलेक्टर राठौर के निर्देशानुसार कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा जून-जुलाई माह में 10 हजार सिन्दुर के पौधे तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। जिसे ग्राम गौठानों में रोपित किया जाएगा।

केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक आर एस राजपूत बताते हैं कि सिन्दुर के पौधे जिसे अंग्रेजी में अन्नाटो या अचौटी कहते है। इसका वैज्ञानिक नाम विक्सा ओरेलाना है। वर्तमान में कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया में 500 पौधे करीब पांच साल पहले लगाए गए थे, जिसमें बीज आना शुरु हो गये है। आदिवासी कृषकों के द्वारा हस्त निर्मित साबून में रंगत हेतु अन्नाटो का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही साथ होली त्योहार में प्राकृतिक रंग के रुप में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।

इसके अर्क का उपयोग अमेरिका व अन्य देशो में भोज्य पदार्थों को रंगने में किया जाता है। मुख्य रुप से इसका उपयोग सौन्दर्य प्रसाधन जैसे – लिपस्टिक,  हेयर डाई,  नेल पॉलिश,  साबुन,  सहित आइसक्रीन व मक्खन में रंगत लाने हेतु भी किया जाता है। इसके बीजों को अन्य मसालों के साथ पीसकर पेस्ट या पाउडर बनाकर भोज्य पदार्थों में रंगत लाने हेतु किया जाता है। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में करीब 400 पौधे रोपित किए जाते है। चार वर्ष के पौधे से 4-5 किलो सूखा बीज प्राप्त होते है।

एक हेक्टर से 800-1000 किलो सूखे बीज प्राप्त होता है। 1000 किलो बीज से 700-800 किलो सिन्दुर का पाउडर प्राप्त होता है। बाजार में सिन्दुर का पाउडर 180 से 200 रूपये किलो तक बिकता है। इस तरह किसान एक हेक्टयेर क्षेत्रफल से 1.25 से 1.50 लाख तक की सकल आमदनी अर्जित कर सकते है।

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