
MP में बढ़ा बाल अपहरण का खतरा, पांच साल में 64% उछले केस; देश में सबसे चिंताजनक तस्वीर
इंदौर
बाल अपहरण के मामलों में मध्य प्रदेश की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। लोकसभा में गृह मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में वर्ष 2024 के दौरान 11,594 बाल अपहरण एवं व्यपहरण के मामले दर्ज हुए।
यह देश में महाराष्ट्र (12,950) के बाद दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। वर्ष 2020 में प्रदेश में ऐसे 7,058 मामले दर्ज हुए थे। यानी पांच वर्षों में बाल अपहरण के मामलों में करीब 64 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
देशभर में वर्ष 2024 में बच्चों के अपहरण के 75,108 मामले दर्ज किए गए। इनमें अकेले मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से अधिक है। यानी देश में दर्ज होने वाले लगभग हर छह मामलों में एक मामला मध्य प्रदेश से जुड़ा है। मध्य प्रदेश के बाद उत्तर प्रदेश (8,350), ओडिशा (6,814), बंगाल (5,661) और राजस्थान (5,414) का स्थान है।
राहत भी, बरामदगी में सुधार
रिपोर्ट का दूसरा पक्ष राहत देने वाला है। वर्ष 2024 में मध्य प्रदेश में 11,669 बाल पीड़ित दर्ज किए गए, जबकि 11,652 बच्चों को जीवित बरामद किया गया। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि बरामदगी के आंकड़ों में पिछले वर्षों में अपहृत होकर बाद में मिले बच्चे भी शामिल हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि बच्चों की तलाश और बचाव के तंत्र पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह आंकड़ा केवल वर्ष 2024 में मिले बच्चों का नहीं है, बल्कि पिछले वर्षों में अपहृत होकर बाद में बरामद हुए बच्चों को भी इसमें शामिल किया गया है।
पांच साल में बड़ी बढ़ोतरी
पांच साल के आंकड़े देखें तो तस्वीर और साफ हो जाती है। साल 2020 में मध्य प्रदेश में ऐसे 7,058 मामले दर्ज हुए थे। पांच साल के भीतर यह आंकड़ा बढ़कर 11,594 तक पहुंच गया। इसका मतलब है कि मामलों में करीब 64 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि बड़ी और चिंता बढ़ाने वाली है। साफ है कि बाल अपहरण की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं।
हर छठा मामला मध्य प्रदेश से
देशभर में साल 2024 में बाल अपहरण के कुल 75,108 मामले दर्ज हुए। इनमें अकेले मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से ज्यादा है। सीधे शब्दों में समझें तो एक अनुपात साफ नजर आता है। देश में दर्ज हर छह मामलों में से एक मामला मध्य प्रदेश का है। यह आंकड़ा प्रदेश की पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। इससे एक बात साफ पता चलती है। समस्या सिर्फ कुछ जिलों तक सीमित नहीं है।
देश के टॉप पांच राज्य
गृह मंत्रालय के आंकड़ों में देश के टॉप पांच राज्य भी सामने आए हैं। यह सूची बाल अपहरण के मामलों पर आधारित है। पहले नंबर पर महाराष्ट्र है, जहां 12,950 मामले दर्ज हुए। दूसरे नंबर पर मध्य प्रदेश है, जहां 11,594 मामले सामने आए। तीसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश है, वहां 8,350 मामले दर्ज हुए। चौथे नंबर पर ओडिशा है, जहां 6,814 मामले दर्ज हुए। पांचवें स्थान पर पश्चिम बंगाल है, जहां 5,661 मामले सामने आए। इन आंकड़ों से एक बात साफ हो जाती है। उत्तर और मध्य भारत में बच्चों की सुरक्षा बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
बरामदगी में राहत भरी खबर
आंकड़ों का एक पहलू राहत देने वाला भी है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में बरामदगी के आंकड़े भी शामिल हैं। साल 2024 में मध्य प्रदेश में 11,669 बाल पीड़ित दर्ज किए गए। इनमें से 11,652 बच्चों को जीवित सुरक्षित बरामद कर लिया गया। यह आंकड़ा दिखाता है कि पुलिस की तलाश व्यवस्था पहले से बेहतर हुई है। हालांकि रिपोर्ट में एक बात साफ की गई है।
बरामदगी के इस आंकड़े में पुराने मामले भी शामिल हैं। इनमें पिछले वर्षों में अपहृत हुए कई बच्चे भी हैं। ये बच्चे बाद के समय में मिले और बरामद माने गए। यानी यह सिर्फ 2024 में अपहृत बच्चों की बरामदगी का आंकड़ा नहीं है। फिर भी आंकड़े बताते हैं कि बरामदगी की दर लगभग 99.8 प्रतिशत रही। यह दर देश के कई राज्यों से बेहतर मानी जा रही है। इससे साफ है कि मामले बढ़े हैं, लेकिन तलाश व्यवस्था भी मजबूत हुई है।
इंदौर में भी सामने आए मामले
हाल के महीनों में ऐसी घटनाएं इंदौर में भी दिखी हैं। प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। कई मामलों में पुलिस ने समय रहते बच्चों को बरामद कर लिया। कुछ मामलों में आरोपियों ने फिरौती की मांग भी की थी। ऐसे मामले पुलिस की सतर्कता और जांच व्यवस्था को परखते हैं। हालांकि हर मामले में अलग-अलग परिस्थितियां और कारण सामने आते हैं। इसलिए किसी एक मामले को दूसरे से जोड़कर देखना ठीक नहीं होगा।
आगे की चुनौती और जरूरत
गृह मंत्रालय के यह आंकड़े एक बड़ा संकेत देते हैं। सिर्फ पुलिस कार्रवाई से यह समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी। स्कूल, परिवार और समाज को भी सतर्क रहना जरूरी है। बच्चों को अजनबियों से बातचीत को लेकर जागरूक करना जरूरी है। मोहल्लों और स्कूलों के आसपास सीसीटीवी कैमरे बढ़ाने से भी मदद मिल सकती है। पड़ोसी और स्थानीय लोग भी सतर्क रहें तो कई मामले जल्दी सुलझ सकते हैं।
राज्य सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती खड़ी है। एक तरफ नए मामलों को रोकना जरूरी हो गया है। दूसरी तरफ पुराने लंबित मामलों की तलाश भी पूरी करनी है। गृह मंत्रालय के यह आंकड़े नीति बनाने में मदद कर सकते हैं। बाल सुरक्षा से जुड़े कानूनों को सख्ती से लागू करने की मांग उठी है। आने वाले महीनों में इस दिशा में नए कदम उठाए जा सकते हैं। तब तक बाल सुरक्षा को लेकर सतर्कता ही सबसे बड़ा और भरोसेमंद बचाव है।
मध्य प्रदेश में साल 2024 में बाल अपहरण के कितने मामले दर्ज हुए?
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार साल 2024 में मध्य प्रदेश में बाल अपहरण और व्यपहरण के 11,594 मामले दर्ज हुए। यह संख्या देश में महाराष्ट्र के बाद दूसरी सबसे ज्यादा है। पांच साल पहले यानी 2020 में यह आंकड़ा 7,058 था, यानी इसमें करीब 64 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
क्या मध्य प्रदेश में अपहृत बच्चों की बरामदगी हो रही है?
हां, गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 में मध्य प्रदेश में 11,669 बाल पीड़ित दर्ज किए गए, जिनमें से 11,652 बच्चों को जीवित सुरक्षित बरामद किया गया। यह करीब 99.8 प्रतिशत की बरामदगी दर है। हालांकि इसमें पिछले वर्षों में अपहृत होकर बाद में मिले बच्चे भी शामिल हैं।
बाल अपहरण के मामलों में देश में कौन से राज्य सबसे आगे हैं?
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र (12,950) पहले नंबर पर है, उसके बाद मध्य प्रदेश (11,594), उत्तर प्रदेश (8,350), ओडिशा (6,814) और पश्चिम बंगाल (5,661) का स्थान है। देशभर में कुल 75,108 मामले दर्ज हुए, जिनमें मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से ज्यादा है।
पांच साल का रिपोर्ट कार्ड
वर्ष– बाल अपहरण के मामले
2020 7,058
2021 9,137
2022 10,125
2023 11,521
2024 11,594
(स्रोतः केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट)
देश में सर्वाधिक मामलों वाले पांच राज्य
महाराष्ट्र – 12,950
मध्य प्रदेश – 11,594
उत्तर प्रदेश – 8,350
ओडिशा – 6,814
बंगाल – 5,661
(स्रोतः केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट)
बच्चों की तलाश में तकनीक बनी सहारा
ट्रैक चाइल्ड पोर्टल को मिशन वात्सल्य से जोड़ा गया।
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अपहरण के हालिया मामले
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ग्वालियर: बुंदेलखंड एक्सप्रेस से अगवा 18 माह की बच्ची को जीआरपी ने बुधवार को 24 घंटे के भीतर सकुशल बरामद कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।

















