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नक्सली हमले में शहीद जवानों को साहित्यकारों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि ..

त्रिवेणी संगम साहित्य समिति राजिम की मासिक बैठक व गोष्ठी सम्पन्न

राजिम। त्रिवेणी संगम साहित्य समिति राजिम नवापारा जिला गरियाबंद के साहित्यकारों ने माँ गायत्री मन्दिर परिसर राजिम में आयोजित काव्य गोष्ठी में साहित्यकारों ने नारायणपुर में हुए नक्सली हमले में शहीद जवानों को अपनी काव्यात्मक भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मकसूदन साहू बरीवाला ने कहा कि नक्सलियों द्वारा किया गया यह हमला कायराना है जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। भावुक कवि मोहनलाल मणिकपन ने शहीदों की शान में कसीदे पढ़ते हुए कहा कि न जमीं देना न आसमां देना, न फूल देना न चमन देना, मैं मर जाऊँ तो तिरंगे का कफ़न देना पढ़कर देशभक्ति का जज्बा पैदा किया, तो कवि रोहित कुमार माधुर्य ने हुंकार भरते हुए कहा कि माँ वसुंधरा पुकारती मेरा लाल चाहिए, पढ़कर जोश और उत्साह से मंच में ओज का वातावरण पैदा कर दिया।

कवि कोमल सिंह साहू ने कहा कि बेसक खींच दो तुम नफ़रत की लकीर, अपनी कुर्बानी से हम बदल देंगे देश की तक़दीर प्रस्तुत करके माहौल को ऊँचाई प्रदान किया। कवियत्री केंवरा यदु, मीरा ने बहुत ही उत्कृष्ट रचना पढ़ते हुए कहा कि माँ माँ होती है, कभी जमीं तो कभी आसमां होती है सुनाकर मंच को भावविभोर कर दिया। कवि संतोष कुमार साहू प्रकृति ने कहा कि धन्य है वे माता पिता जिसने तुझे जन्म दिया, माँ भारती के कोख़ को तूने आज अमर किया इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए मंच संचालन कर रहे कवि श्रवण कुमार साहू प्रखर ने कहा कि भारत माँ का बच्चा-बच्चा जब तेरी याद में रोया था, ये मत पूछो अपने पीछे तूने क्या क्या खोया था।

कार्यक्रम के अंत में 2मिनट का मौन रखकर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए सभी साहित्यकारों ने अपनी कृतज्ञता व्यक्त किया। आभार प्रदर्शन कवि रोहित माधुर्य ने किया।

 

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