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बीडीओ समेत 39 अफसरों पर एफआईआर, कोरोना काल में रोजगार देने में भारी घोटाला …

रांची। मनरेगा में 54 करोड़ के घोटाला प्रकाश में आया है। इस मामले में शिकंजा कसना शुरू हो गया है। घोटाले में लिप्त झारखंड के अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। इसी क्रम में रांची में बीडीओ समेत 39 अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। 2020-21 में हुई गड़बड़ियों के लिए 13 जबकि 2021-22 के दौरान छह अफसरों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। वहीं, सोशल ऑडिट में आई गड़बड़ी के बाद 20 अधिकारियों पर केस दर्ज कराया गया है।

मनरेगा में 54 करोड़ का घोटाला सामने आने के बाद ग्रामीण विकास विभाग राशि वसूली में जुटा है। वहीं, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी निर्देश दिया है कि जब तक दोषी पर प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई नहीं होदी और दोषी संविदाकर्मी को सेवा से नहीं हटाया जाता है तब तक मनरेगा की राशि नहीं दी जाएगी।

मनरेगा घोटाले में अब तक 33 कर्मियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है। इसमें सबसे ज्यादा दुमका में 11 कर्मी बर्खस्त किए गए हैं। रांची में 23 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू की गई है। 2020-21 में 919 और 2021-22 वित्तीय वर्ष में 970 अधिकारी व कर्मियों से राशि की वसूली की जा रही है.

मनरेगा के तहत लॉकडाउन में रोजगार सृजन पर खास ध्यान दिया गया। विभिन्न अभियानों के संचालन से रोजगार सृजन संभव हो पाया है। कोरोना काल के दौरान राज्य में 1021 लाख से अधिक मानव दिवस का सृजन किया गया। पूर्व के वर्षों में औसतन लगभग 1.5 लाख लोग प्रतिदिन कार्य करते थे, वहीं मौजूदा सरकार के प्रयास से इस वित्तीय वर्ष में औसतन लगभग 4 से 5 लाख लोग प्रतिदिन कार्य कर रहे हैं। इस प्रकार मानव दिवस के सृजन में बढ़ोतरी हुई है।

वित्तीय वर्ष 2021-22 में अबतक 1021 लाख से अधिक मानव दिवस का सृजन किया जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में 1200 लाख से अधिक मानव दिवस सृजन का लक्ष्य लेकर कार्य किया जा रहा है। मानव दिवस सृजन में वृद्धि राज्य सरकार द्वारा रोजगार सृजन एवं उपयोगी परिसंपत्तियों के निर्माण के लिये शुरू की गई नीलांबर-पीताम्बर जल समृद्धि योजना, बिरसा हरित ग्राम योजना, वीर शहीद पोटो हो खेल विकास योजना, दीदी बाड़ी योजना, दीदी बगिया योजना और मनरेगा पार्क की अहम भूमिका देखी जहा रही है। इन योजनाओं को गति देने के लिये ‘‘ग्रामीणों की आस, मनरेगा से विकास अभियान’’ की शुरुआत की गई थी। इन योजनाओं के माध्यम से जहां ग्रामीणों को जल स्वावलंबी बनाकर उन्हें एक फसल से दो या तीन फसल का उत्पादन करने में मदद मिल रही है, वहीं फलदार पौधारोपण के माध्यम से ग्रामीणों की आजीविका को भी समृद्ध बनाया जा रहा है।

सरकार मनरेगा के तहत रोजगार सृजन के साथ ग्रामीणों की कृषि एवं पशुपालन आधारित आजीविका के प्रति भी संवेदनशीलता से कार्य कर रही है। इसके तहत सिंचाई कूप एवं पशु शेड का निर्माण कराया जा रहा है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में अबतक कुल 8737 सिंचाई कूप की योजनाओं का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है तथा 52284 योजनाओं पर कार्य जारी है। इसी प्रकार 11780 विभिन्न पशु शेडों की योजनाओं को पूरा किया गया है और 63571 पर कार्य जारी है।

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