मध्य प्रदेश

राजधानी के वीआईपी स्विमिंग पूल प्रकाश तरण पुष्कर में मौत, बगैर कोच सीख रहा था तैरना ….

भोपाल। राजधानी भोपाल में वीआईपी स्विमिंग पूल माने जाने वाले प्रकाश तरण पुष्कर में आज सुबह एक व्यक्ति की डूबने से मौत हो गई। बिना किसी कोच के वह यहां रोज तैराकी सीखने जाता था। हादसे के वक्त पूल में कोई गोताखोर नहीं था, जो गहरे पानी में पहुंचे उक्त व्यक्ति को बचा सके। सूचना पर पहुंची टीटी नगर पुलिस जांच कर रही है। इस स्वीमिंग पूल में मंत्रियों और बड़े अधिकारियों के परिवार के लोग नियमित रूप से तैराकी सीखने और करने के लिए जाते हैं।

बताया जा रहा है कि शहर के लिंक रोड नंबर वन स्थित प्रकाश तरण पुष्कर में गुरुवार को सुबह लगभग 10 बजे रमेश अहिरे नामक यह व्यक्ति तैराकी सीख रहा था। वो तैरते समय गहरे पानी में चला गया और डूब गया। घटना के वक्त वहां पर कोई भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे और न ही कोई गोताखोर ही मौके पर तैनात था। हादसे के बाद स्विमिंग पूल में सन्नाटा पसर गया और वहां सिर्फ प्रबंधन और पुलिस के लोग ही मौजूद थे। भोपाल के वीआईपी क्षेत्र के इस स्वीमिंग पूल  में बड़ी संख्या में मंत्रियों, बड़े अधिकारियों और नेताओं के परिवार के लोग स्वीमिंग करने आते हैं। इससे पहले जून माह में भी 7 साल का एक बच्चा तैराकी सीखते समय बाल-बाल बचा था। तनिष्क विश्वकर्मा नामक इस बच्चे को गंभीर हालत में जेपी अस्पताल ले जाया गया था। इसके बाद उसे कमला नेहरू अस्पताल रेफर किया था। हालांकि, बच्चा बच गया था, लेकिन उस समय भी स्वीमिंग पूल प्रशासन की लापरवाही सामने आई थी। इससे कुछ दिन पहले भी एक युवती डूबते-डूबते बची थी। लेकिन, इस बार यह बड़ा हादसा हो गया।

गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही तुलसी नगर स्थित प्रकाश तरण पुष्कर को राजधानी परियोजना प्रशासन से पीडब्ल्यूडी को सौंप दिया गया था। इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने भी एक प्रस्ताव बनाकर इसे खेल विभाग को सौंपने को कहा है। पीडब्ल्यूडी का मानना है कि स्वीमिंग पूल का संचालन पीडब्ल्यूडी का काम नहीं है।

पुलिस के मुताबिक तरण पुष्कर स्विमिंग पूल में 42 वर्षीय रमेश अहिरे तैराकी सीखने के लिए रोजाना आता था। गुरुवार सुबह करीब 10 बजे वह स्विमिंग पूल में तैराने के लिए पहुंचे और अचानक गहरे पानी में चले गए, जहां पानी में डूबने से उनकी मौत हो गई। मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस स्वीमिंग पूल प्रबंधन से पूछताछ कर रही है। जांच के बाद ही मामले में कुछ कहा जा सकता है।

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