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कांग्रेस ने कहा- अन्नदाता को अर्बन नक्सली और नक्सलवादी कहने के लिये भाजपा मांगे माफी

रायपुर (गुणनिधि मिश्रा)। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के किसानों को धान का दाम 1800रू. प्रति क्विंटल नहीं, 2500रू. प्रति क्विंटल मिल रहा है। बृजमोहन अग्रवाल इसमें केन्द्र सरकार के भूमिका स्पष्ट करें। किसानों को 2500 रू. देने वाली योजना को अन्याय की श्रेणी देने वाले बृजमोहन अग्रवाल बतायें कि बिहार में किसानों को 400-500 रू. की धान का दाम मिल रहा है। बिहार में भाजपा गठबंधन में शामिल है। किसानों को समर्थन मूल्य का 25-30 प्रतिशत भी नहीं मिल रहा है, क्या बृजमोहन अग्रवाल इसे न्याय कहते है?

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ और देश में किसानों को हो रही हरेक परेशानी के लिये भाजपा ही जिम्मेदार है। पहले मोदी सरकार से कहकर छत्तीसगढ़ के किसानों के धान से बने चांवल सेन्ट्रल पूल में उपार्जन में बाधा डाली गयी। कांग्रेस सरकार ने तो अपने बलबूते पर धान की खरीद आरंभ की। इससे बौखलाकर किसानों को भड़काने और धान खरीदी केन्द्रों में अव्यवस्था फैलाने में भाजपा और रमन सिंह जैसे किसान विरोधी नेता लगे रहे। इस साल बारदाना खरीदी में केन्द्र सरकार द्वारा डाली गयी। इस कृत्य के लिये छत्तीसगढ़ में किसान कभी भाजपा को माफ नहीं करेगा।

रमन सिंह की सरकार ने जिसमें बृजमोहन अग्रवाल मंत्री रहे, नान और धान में घोटालों और भ्रष्टाचार को अवैध कमाई का जरिया बना रखा था। रमन सरकार के दौरान किसानों को धान बेचने पांच बार सोसायटी जाना पड़ता था। अब तीन बार में किसानों के पूरा धान खरीदा जा रहा है। पूर्ववर्ती रमन सरकार के दौरान धान बेचने वाले किसानों से प्रति बोरा रमन टैक्स की वसूली होती थी। रमन टैक्स वसूलने वाले आज किसानों के हित की बात कर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। सोसायटीओं में किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं है। रमन सिंह खुद अव्यवस्था फैलाने में लगे है। भूपेश बघेल की सरकार में धान तस्करों और कोचियों पर कार्यवाही की पीड़ा ही रमन सिंह के बयानों से झलक रही है। रमन सिंह और बृजमोहन अग्रवाल को किसानों से कोई हमदर्दी नहीं है। इनकी सरकार में जब किसान खेतों में लटक रहे थे, तब रमन सिंह सुवा नृत्य में मटक रहे थे।

अगर भाजपा के नेताओं ने छत्तीसगढ़ के किसानों के हित में सेंट्रल पुल के नियम को शिथिल रखने की मांग करते हुए और बारदाना की सही आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये कोई पत्र लिखा है तो वे सार्वजनिक करें? बोनस का अलग भुगतान मिलने की जो आलोचना भाजपा नेताओं ने की है वह तो रमन सिंह सरकार के समय की ही व्यवस्था है। किसानों का विश्वास खो चुके भाजपा के नेता किसानों को बरगलाने के लिए तथ्यहीन बेबुनियाद मनगढ़ंत आरोप लगाकर खुद को किसान हितैषी बताने में लगे हुए हैं।

उन्होंने पूछा है कि भाजपा बतायें कि लोकसभा चुनावों में किये गये किसानों की आय दुगुनी करने का वादा भाजपा कब निभायेगी? भाजपा की केन्द्र सरकार द्वारा समर्थन मूल्य में की जा रही 50-50 रू. की वृद्धि से तो किसानों की आय दुगुनी होने वाली नहीं है। अब तो समर्थन मूल्य मंडी और सरकारी धान खरीदी की पूरी व्यवस्था को मोदी सरकार समाप्त करने पर तुली है।

पिछले साल ही केन्द्र सरकार के कृषि लागत एवं मूल्य आयोग ने धान का लागत मूल्य प्रति कि्ंवटल 1484 रू. तय किया था, जिसमें बीज, खाद, मजदूरी सहित सभी कृषि आदानो की लागत को जोड़ा गया है। भाजपा बार-बार स्वामिनाथन कमेटी के सिफारिशों को लागू करने की बात करती है लेकिन इसे लागू करने का साहस भाजपा की केन्द्र सरकार में है ही नहीं। किसान समर्थक कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने छत्तीसगढ़ में जरूर यह कर दिखाया है।

मोदी सरकार किसानों की मसीहाई का नाटक बंद करें। भाजपा की अटल बिहारी बाजपेई सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 6 वर्षो में 490 रू. से 550 रू. किया था। (मात्र 60 रू. की वृद्धि), अब मोदी सरकार ने चार वर्षो में मात्र 200 रु.की थी और परिहार साल 200 रू. की, पौर साल 85 रू. की वृद्धि की थी। इस वर्ष सिर्फ 50-50 रू. प्रति क्विंटल की धान के समर्थन मूल्य में वृद्धि किसानों के साथ मोदी सरकार का भद्दा मजाक है। भाजपा की सरकारों ने धान का समर्थन मूल्य 11 वर्षो में कुल 460 रू. की वृद्धि की है, जो कि स्पष्ट रूप से भाजपा के किसान विरोधी धान विरोधी रवैये को उजागर करती है। जबकि कांग्रेस ने 10 वर्षो में 890 रू. की वृद्धि की है। यूपीए 1 में धान का समर्थन मूल्य 5 वर्षों में 2004 से 2009 तक 450 रूपयें बढ़ाया गया। (550 रू. प्रति कि्ंवटल से 900 रू. प्रति कि्ंवटल) और यूपीए 2 में 2009 से 2014 तक 5 वर्षों में धान का समर्थन मूल्य 440 रूपयें बढ़ाया गया।

किसानों को अर्बन नक्सली कहने वाले बृजमोहन अग्रवाल खेती की इतनी समझ भी नहीं रखते है कि किसानों शहरों में अर्बन इलाकों में नहीं गांवो में रहते है। बृजमोहन अग्रवाल की पार्टी भाजपा द्वारा लाये गये तीनों कानून किसानों और आम उपभोक्ता के पेट में लात मारने के लिये लाये गये कानून है।

मोदी सरकार ने धान के लागत मूल्य पर 50 प्रतिशत अधिक दाम देने का वादा क्यों नहीं निभाया? अगर भाजपा वाकई में किसान हितेषी होती तो 2014 के लोकसभा चुनाव में स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू करने का वादा निभाती। किसानों को धान के लागत मूल्य पर 50 प्रतिशत अधिक दाम देने का वादा नहीं निभाने का कारण मोदी सरकार और भाजपा किसानों को, प्रदेश और देश की जनता को बतायें? कोंग्रेस ने मांग की है कि किसानों को उनकी फसल की लागत मूल्य पर 50 प्रतिशत लाभ देने का साहस दिखाएं जैसा कि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार भूपेश बघेल की सरकार कर रही है। धान का 300 रू. बोनस 5 साल देने का संकल्प तक तो जिस भाजपा ने नहीं निभाया, उस भाजपा से किसानों के भले की उम्मीद कभी नहीं की जा सकती है।

मोदीकाल’ में किसान ‘काल का ग्रास’ बनने को मजबूर हो गया है। न समर्थन मूल्य मिल पा रहा है, न मेहनत की कीमत, न कर्ज से मुक्ति मिली, न किसान के अथक परिश्रम का सम्मान, न खाद, कीटनाशक दवाई, बिजली, डीज़ल की कीमतें कम हुईं और न ही हुआ किसान को फसल के सही बाजार भावों का इंतजाम।

अन्नदाता किसान का पेट केवल ‘जुमलों’ और ‘कोरे झूठ’ से नहीं भर सकता। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री और संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने पूछा है कि क्या झूठी वाहवाही लूटने, अपने मुंह मियाँ मिट्ठू बनने, ऊँट के मुंह में जीरा डाल नगाड़े बजाने व समाचारों की सुर्खियां बटोरने से आगे बढ़कर मोदी देश को और किसानों को जवाब और उनकी समस्याओं का सही समाधान देगें।

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