मध्य प्रदेश

भगवान रावण का अनोखा भक्त, वह राम का नहीं भगवान रावण के भक्त हैं, 40 साल से कर रहे लंकेश की पूजा ….

जबलपुर. भगवान राम के भक्त तो सब हैं, लेकिन यहां एक शख्स ऐसा है जो अपनी रावण भक्ति के कारण संस्कारधानी समेत मध्यप्रदेश के पूरे महाकौशल में मशहूर है. जबलपुर के पाटन क्षेत्र का निवासी संतोष नामदेव की रावण के प्रति अनोखी भक्ति के कारण अपनी अलग पहचान है. यहां तक कि उसका नाम भी लंकेश पड़ गया है. जब लोग सुबह उठकर राम को याद करते हैं, तो लंकेश भगवान रावण की पूजा कर रहे होते हैं. लंकेश 40 साल से भगवान रावण की मूर्ति को नवरात्रि की पंचमी पर स्थापित करते हैं और दशहरे के दिन जब पूरा देश रावण का दहन करता है, उस दिन वह उसका विसर्जन करते हैं.

यूं तो भारत में कई धर्म और समुदाय के लोग रहते हैं. सभी अपने-अपने धर्मों के अनुसार ईष्ट देव की पूजा करते हैं, लेकिन संतोष नामदेव की रावणभक्ति अपने आप में अनूठी है. पेशे से टेलर संतोष नामदेव उर्फ लंकेश कई सालों से भगवान रावण की पूजा करते आ रहे हैं, इस कारण उनकी पहचान भी लंकेश के रूप में ही बन चुकी है. भले ही समाज भगवान रावण की बुराई से परिचित हो, लेकिन लंकेश भगवान रावण की अच्छाइयों को ग्रहण कर आगे बढ़ रहे हैं. संतोष की रावण भक्ति से तो हर कोई प्रभावित है ही, उसके साथ उनका परिवार और पड़ोस के लोग भी भगवान रावण का पूजन करते हैं. संतोष नामदेव का मानना है कि भगवान रावण बहुत बुद्धिमान और ज्ञानी थे. उसके अंदर कोई भी दुर्गण नहीं था. उन्होंने जो भी किया, वह अपने राक्षस कुल को तारने के लिए किया. उनका कहना है कि भगवान रावण ने सीता का अपहरण करने के बाद उन्हें अशोक वाटिका में रखा था, जहां किसी भी नर, पशु-पक्षी, जानवर या राक्षस को जाने की अनुमति नहीं थी. यह उसकी सीता के प्रति सम्मान की भावना को व्यक्त करता है. भगवान रावण भक्त लंकेश ने अपने दोनों बेटों का नाम भी रावण के बेटों की तरह ही रखे हैं. एक बेटे का नाम मेघनाद है तो दूसरे का अक्षय है.

संतोष पारिवारिक रूप से संपन्न हैं और उनका मानना है उनके पास जो भी कुछ है, वह सब भगवान रावण की भक्ति से ही मिला है. उनकी अनोखी आस्था के कारण आसपास के लोग भी उनसे काफी प्रभावित हैं. नवरात्रि के समय जब वे भगवान रावण की प्रतिमा की स्थापना करते हैं, तो इलाके के लोग उन्हें पूरा सहयोग करते हैं. इसके साथ ही धूमधाम से भगवान रावण की शोभायात्रा भी निकालते हैं.

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