
दिल्ली सरकार का बड़ा प्लान: 11.4 एकड़ में ई-वेस्ट इको पार्क, 30 साल लीज पर निजी कंपनी
नई दिल्ली
राजधानी की दिल्ली सरकार इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) के निपटारे के लिए बनने वाले ई-वेस्ट इको पार्क को अब पीपीपी मॉडल पर विकसित करेगी। सरकार को इसपर कोई पैसा खर्च नहीं करना होगा। दिल्ली सरकार की दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ( DSIIDC ) ने टेंडर जारी कर इसके लिए निजी कंपनियों से प्रस्ताव मांगे है। सूत्रों की मानें तो चयनित कंपनी को यह परियोजना 30 साल के लिए लीज पर दी जा सकती है।
दिल्ली में हर साल 2 लाख टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा निकलता है
राजधानी दिल्ली में हर साल 2 लाख टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा निकलता है। यह देश में निकलने वाले कुल इलेक्ट्रॉनिक कचरे का 9.5 पर्सेट है। इसलिए तत्कालीन सरकार ने वर्ष 2022 में होलंबी कलां में 21 एकड़ क्षेत्र में ई-वेस्ट इको पार्क बनाने का फैसला किया था। उस समय कई कोशिशों के बाद भी डीडीए की ओर से पूरी जमीन उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण यह योजना लटकी रही।
मौजूदा सरकार ने 11.4 एकड़ में विकसित करने का फैसला लिया
अब मौजूदा सरकार ने इसे 11.4 एकड़ में विकसित करने का फैसला किया है। डीडीए ने इसके लिए जमीन भी उपलब्ध करा दी है। DSIIDC के दस्तावेजों के मुताबिक, यह परियोजना PPP मॉडल पर विकसित की जाएगी। इसके तहत चयनित कंपनी ई-वेस्ट 2 लाख टन ई-वेस्ट दिल्ली में हर साल निकलता है।
ई-वेस्ट इको पार्क में कैसे होगा काम
- ई-वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के तहत, पुराने मोबाइल, टीवी, फ्रिज और कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक कचरे को सुरक्षित तरीके से नष्ट और अलग किया जाएगा।
- जो उपकरण ठीक किए जा सकते हैं, उनकी मरम्मत करके उन्हें दोबारा उपयोग के लिए तैयार किया जाएगा।
- पार्क में एक डेडिकेटेड इलेक्ट्रॉनिक बाजार होगा, जहां रीसायकल और नवीनीकृत किए गए सामानों को बेचा जाएगा।
- कचरे से प्लास्टिक को अलग किया जाएगा और कीमती धातुओं को निकालने व दोबारा निर्माण (Remanufacturing) करने की तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।















