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केंद्र सरकार ने भेजा लिखित प्रस्ताव, किसान कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े आंदोलनकारी …

नई दिल्ली । कृषि कानून के खिलाफ जारी आंदोलन के बीच आज किसान प्रतिनिधि मंडल और गृहमंत्री अमित शाह के बीच हुई बातचीत में कोई निर्णायक फैसला नहीं हो सका। संगठन की ओर से यह कहा गया कि सरकार के प्रस्ताव पर हम विचार कर रहे हैं। साथ ही आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है।

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज 14वां दिन है। तय कार्यक्रम के मुताबिक किसानों की ओर से 13 प्रतिनिधि मंडल गृहमंत्री से बातचीत करने पहुंचा। लगभग चार घंटे चली बातचीत में किसी हल निकलने की बात कही जा रही थी मगर ऐसा नहीं हुआ। सरकार का मसौदा हाथ में आने पर भारतीय किसान यूनियन की ओर से कहा गया कि हम भारत सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर विचार-विमर्श करने जा रहे हैं। उसके बाद आगे की बात होगी। इधर, अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हनन मुल्ला ने कहा कि कल बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला। सरकार ने 10 दिसंबर को बैठक के लिए बोला है, अगर प्रस्ताव के बाद कुछ सकारात्मक निकल कर आता है तो कल बैठक हो सकती है।

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मंगलवार को शाह के साथ बैठक को ‘सकारात्मक’ बताते हुए कहा कि सरकार किसान नेताओं को आज एक मसौदा देगी, जिस पर हम किसानों के साथ चर्चा करेंगे। टिकैत ने कहा, “मैं कहूंगा कि बैठक सकारात्मक थी। सरकार ने हमारी मांगों पर संज्ञान लिया है और कल हमें एक मसौदा दिया जाएगा, जिस पर हम विचार-विमर्श करेंगे।”

सिंघु बॉर्डर पर डटे किसान नेता कंवलप्रीत सिंह पन्नू ने कहा है कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द किया जाना चाहिए। यह हमारी मांग है। प्रस्ताव में सिर्फ संशोधन की बात है तो फिर हम उसे खारिज कर देंगे। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष, मंजीत सिंह ने कहा कि हम प्रस्ताव को पढ़ेंगे, फिर इस पर चर्चा के बाद कोई फैसला लिया जाएगा। प्रस्ताव लगभग 20 पन्नों का है।

सरकार की ओर से किसानों को कृषि कानून को लेकर प्रस्ताव सौंपा गया है। सरकार का मसौदा हाथ में आने पर भारतीय किसान यूनियन राज्य अध्यक्ष ने कहा कि हम भारत सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर विचार-विमर्श करने जा रहे हैं। उसके बाद आगे की बात होगी। आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने कहा कि आज देश का किसान केंद्र सरकार से मांग कर रहा है कि इस कानून को वापस लो। बीजेपी को ऐसा कौन-सा रहस्यमयी फायदा इन 3 कृषि कानूनों से होने जा रहा है जिसके बारे में एक भी किसान नहीं समझ पा रहा लेकिन पूरी बीजेपी समझ रही है। बीजेपी को इसे अहंकार की लड़ाई नहीं बनाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मोदी के रहते किसानों का अहित नहीं हो सकता। विरोधी दलों को अगर मोदी और भाजपा का विरोध करना है तो मुद्दे पर आएं। किसान के कंधे पर बंदूक रखने की कोशिश न करें। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि किसान वापस नहीं जाएगा, अब किसान के मान-सम्मान का सवाल है। सरकार कानून वापस नहीं लेगी, तानाशाही होगी? अगर सरकार हठधर्मी पर है तो किसान की भी हठ है। ये पूरे देश के किसानों का सवाल है।

 

अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हनन मुल्ला ने कहा कि कल बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला। सरकार आज सुबह 11 बजे तक प्रस्ताव लिखकर भेजेगी, 12 बजे सिंघु बॉर्डर पर हमारी बैठक है। सरकार ने 10 दिसंबर को बैठक के लिए बोला है, अगर प्रस्ताव के बाद कुछ सकारात्मक निकल कर आता है तो कल बैठक हो सकती है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के कार्यकर्ता गुरशरण सिंह ने कहा “हमने पंजाब के अधिक से अधिक लोगों को आंदोलन में शामिल होने और इसे और मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित करना शुरू किया है। हम स्थानीय युवाओं और हमारे प्रवासी भारतीयों की मदद से ऐसा कर रहे हैं। ”

पंजाब के शिरोमणि अकाली दल के कार्यकर्ता आज केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे किसानों को दिल्ली-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक पेट्रोल पंप पर मुफ्त डीजल मुहैया करा रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि हम केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए मसौदे पर एक बैठक करेंगे। वह बैठक (सरकार के साथ 6 वें दौर की वार्ता) रद्द कर दी गई है। ड्राफ्ट पर चर्चा की जाएगी और आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। हमें उम्मीद है कि आज शाम 4-5 बजे तक चीजें स्पष्ट हो जाएंगी।

कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर टिकरी बॉर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “ये कानून रद्द करने होंगे, ये किसानों के खिलाफ हैं।” किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी पंजाब के सुखविंदर सिंह सभरा ने कहा कि सरकार इस समय हड़बड़ाहट में है, कल शाम बुलाई गई बैठक बेफायदा थी। प्रस्ताव भेजना था तो 6 या 7 दिसंबर को भेजते। अगर प्रस्ताव में संशोधन की बात आती है तो उससे बात नहीं बनेगी।

दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर दोपहर 12 बजे किसान संगठनों की बैठक होगी.. किसान नेता हनन मुल्ला ने कहा है कि कृषि कानूनों को निरस्त करना होगा और इसके अलावा बीच का कोई रास्ता नहीं है। किसानों के प्रदर्शन की वजह से आज भी कई रास्ते बंद है, कुछ जगहों पर ट्रैफिक को भी डायवर्ट किया गया है. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। इसके मुताबिक, आज सिंघु बार्डर, औचंदी बॉर्डर, पियाओ मनियारी बॉर्डर और मंगेश बॉर्डर यातायात के लिए पूरी तरह बंद है। एनएच-44 भी दोनों तरफ से बंद रहेगा. जो लोग इन इलाकों से गुजरने वाले हैं इन्हें वैकल्पिक रास्तों से आने जाने की सलाह दी गई है।

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